स्मॉग की चादर ने किया लोगो को घरों में कैद : नीलम चौधरी
अस्पतालों से हुई दवाएं गायब ,जनता परेशान
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : समस्त रोहताश नगर आर.डब्लू.ए.की संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता नीलम चौधरी का कहना है लगातार दो महीनों से राजधानी दिल्ली के लोग प्रदूष्ण की मार झेल रहे हैं अब तो आलम यह हो गया है घरों से बाहर निकलने पर भी सोचना पड़ रहा है | हर घर में लोग प्रदूष्ण की वजह से बीमारियों की चपेट में आ रहे है ,बाजारों से हवा साफ़ करने वाले संयत्र गायब है | दवा की दुकानों पर दवाएं के स्टाक खत्म मिल रहे है सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों से भी लोग निराश लौट रहे है ना तो वहां लोगो को इलाज मिल रहा और ना ही दवाएं |
नीलम चौधरी कहती हैं ट्रिपल इंजन की सरकार प्रदूषण से निपटने में एकदम असहाय साबित हो रही है | मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दूसरे मंत्री रोजाना प्रदूष्ण से लड़ने की बात करते हैं लेकिन हालात पर काबू नहीं पाया जा रहा | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के बड़े हिस्से में स्मॉग की चादर छाई हुई है | दिल्ली में स्मॉग की समस्या इतनी गंभीर है कि लोग घरों के भीतर कैद हैं |सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर का अनुमान है कि अकेले दिल्ली में ही 2023 में वायु प्रदूषण के कारण कई हजार लोगों की जान गई, कुल मिलाकर खराब हवा राजधानी में हर साल स्वस्थ जीवन के अनेक साल कम कर देती है | ऐसा नहीं है कि दिल्ली की हवा साफ नहीं हो सकती. अमेरिका, ब्रिटेन और चीन ने ये कर दिखाया है. अगर बीजिंग में आसमान का रंग नीला हो सकता है तो दिल्ली में क्यों नहीं |

नीलम चौधरी कहती हैं एक तरफ लोग जानलेवा प्रदूषण के कारण अपनी जिंदगी से जूझ रहे है और उन्हें सांसों का संकट सताने लगा है और दूसरी ओर अस्पतालों में बढ़तें सांसों की बीमारियों और फेंफड़ों संबधी रोगियों के कारण दिल्ली सरकार की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था भी आड़े आ रही है | सांस से संबधित बीमारियों की दवाई दुकानों पर भी नही मिल रही है। फेंफड़ों और सांस की बीमारी को ठीक करने वाली दवाईयों की कालाबजारी के कारण बाजार में कमी चल रही है और ये दवाएँ ओने पौने दामो पर मिल रही हैं। फेंफड़ों और सांस की बीमारी को ठीक करने वाली दवाईयों की बाजार में कमी जमाखोरी के कारण हो रही है।
नीलम चौधरी कहती हैं लंबे समय तक प्रदूषित हवा के सम्पर्क में रहने के कारण सीधा असर फेंफड़ों, गले और आंखों पर पड़ रहा है और राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल सहित दिल्ली सरकार के अस्पतालों में प्रदूषण से प्रभावित रोगियों की संख्या 50-60 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि ट्रेफिक पुलिस, डिलीवरी एजेंट, और स्कूली बच्चे सहित ज्यादा समय बाहर बिताने वाले लोग प्रदूषण से सीधा प्रभावित हो रहे है।



