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Bengal: 19 साल बाद कोलकाता लौटेंगी लेखिका तस्लीमा नसरीन, ‘कट्टरता विरोधी’ साहित्यिक कार्यक्रम में लेंगी हिस्सा

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Bengal: 19 साल बाद कोलकाता लौटेंगी लेखिका तस्लीमा नसरीन, ‘कट्टरता विरोधी’ साहित्यिक कार्यक्रम में लेंगी हिस्सा

कोलकाता, 14 जुलाई। बांग्लादेश की चर्चित और विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन लगभग 19 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर कोलकाता लौटने जा रही हैं। वर्ष 2007 में उनके लेखन को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों और विवादों के बाद उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा था। अब 1 अगस्त को वह शहर में आयोजित एक ‘कट्टरता विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम’ में भाग लेंगी। इस कार्यक्रम को पश्चिम बंगाल में हाल ही में बनी भाजपा सरकार के दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक कट्टरता के विरोध के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

तस्लीमा नसरीन ने स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी कोलकाता यात्रा की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि वह 1 अगस्त को कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगी, जहां वह अपनी कविताओं का पाठ भी करेंगी। इस कार्यक्रम का आयोजन कई धर्मनिरपेक्ष और कट्टरता विरोधी संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि इसे अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन का संदेश देने वाले मंच के रूप में भी प्रस्तुत किया जाएगा। तस्लीमा नसरीन की लंबे समय बाद कोलकाता वापसी को लेकर साहित्यिक और राजनीतिक दोनों ही क्षेत्रों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

‘पश्चिमबांगर जोन्नो’ संगठन के प्रतिनिधि और कार्यक्रम के आयोजक मोहित रॉय ने कहा कि यह तस्लीमा नसरीन की शहर में वापसी का एक ऐतिहासिक अवसर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 में तत्कालीन वामपंथी सरकार ने कट्टरपंथी दबाव के आगे झुकते हुए तस्लीमा नसरीन को शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया था। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां पहले से अलग हैं और अब बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नया माहौल बनाया जा रहा है।

आयोजकों ने यह भी जानकारी दी कि राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। हालांकि, जब उनसे यह पूछा गया कि क्या तस्लीमा नसरीन भविष्य में स्थायी रूप से कोलकाता में रहेंगी, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है और उनका यह दौरा केवल कार्यक्रम में भाग लेने तक सीमित है।

राजनीतिक दृष्टि से भी तस्लीमा नसरीन की वापसी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह केवल एक लेखिका की वापसी नहीं, बल्कि धार्मिक कट्टरता के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है। पार्टी का आरोप है कि पिछली वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी का रास्ता कभी नहीं खोला, जबकि वह लगातार शहर लौटने की इच्छा व्यक्त करती रही थीं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भाजपा के राज्यसभा सांसद और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संसद में केंद्र सरकार से तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की थी। उन्होंने तस्लीमा को इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ मुखर आवाज बताते हुए कहा था कि उन्हें स्वतंत्र रूप से भारत में साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए।

वहीं, तस्लीमा नसरीन पहले भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि वह किसी भी राजनीतिक दल के लिए राजनीतिक मुद्दा या प्रचार का माध्यम नहीं बनना चाहतीं। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि उनकी इच्छा केवल इतनी है कि उन्हें शांतिपूर्वक साहित्यिक कार्यक्रमों, पुस्तक मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने की अनुमति मिले। उनका मानना है कि साहित्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए।

तस्लीमा नसरीन की प्रस्तावित कोलकाता यात्रा को लेकर साहित्यिक जगत, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। माना जा रहा है कि लगभग दो दशक बाद उनकी यह वापसी पश्चिम बंगाल की राजनीति और सांस्कृतिक विमर्श दोनों में नई बहस को जन्म दे सकती है।

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