Tahawwur Rana: 26/11 हमलों का गुनहगार तहव्वुर राणा भारत लाया गया, NIA ने की गिरफ्तारी
26/11 मुंबई आतंकी हमलों के अहम साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। इस मामले में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जो वर्षों की कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों का परिणाम है। राणा को गुरुवार शाम करीब 6:22 बजे एक विशेष अमेरिकी विमान से दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट लाया गया, जहां पहले से ही एनआईए और दिल्ली पुलिस की टीमें सुरक्षा के कड़े इंतजामों के साथ मौजूद थीं।
जैसे ही विमान ने लैंड किया, उसे एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल नंबर चार की ओर ले जाया गया। वहां एक सुसज्जित और प्रशिक्षित टीम ने उसे कस्टडी में लिया। शाम 6:30 बजे राणा विमान से उतरा और महज 10 मिनट बाद शाम 6:40 बजे उसे आधिकारिक रूप से यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद एक मेडिकल टीम ने उसका प्राथमिक परीक्षण किया। डॉक्टरों की एक विशेष टीम पालम एयरपोर्ट पर ही मौजूद थी, जिसने मौके पर ही उसका मेडिकल टेस्ट किया और उसकी मेडिकल रिपोर्ट जल्द ही पेश किए जाने की संभावना है।
एनआईए की ओर से यह पुष्टि की गई है कि राणा को IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध), 121A (युद्ध की साजिश), 302 (हत्या), 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल), और UAPA की धारा 16, 18 और 20 के तहत गिरफ्तार किया गया है। 11 नवंबर 2009 को इस केस की FIR NIA ने दर्ज की थी और तभी से तहव्वुर राणा की भारत में तलाश और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
गिरफ्तारी के बाद अब राणा को आज ही पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस बीच कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया गया है। एनआईए कोर्ट के बाहर दिल्ली पुलिस की कई टीमें तैनात हैं, बख्तरबंद वाहन और खाली पुलिस वैन पहले ही मौके पर पहुंचा दी गई हैं। कोर्ट के बाहर कवरेज कर रहे पत्रकारों के आईडी कार्ड भी जांचे जा रहे हैं और मीडिया की कोर्ट के अंदर एंट्री फिलहाल रोक दी गई है। पुलिस और एजेंसियों को इनपुट मिला है कि पेशी के दौरान सुरक्षा में कोई ढील न बरती जाए, इसी वजह से पटियाला हाउस कोर्ट के पास मौजूद जवाहर लाल नेहरू मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2 भी बंद कर दिया गया है।
दिल्ली लीगल सेल की ओर से राणा की ओर से कोर्ट में पैरवी के लिए वकील पीयूष सचदेवा को नामित किया गया है, जो अदालत में उसकी तरफ से पक्ष रखेंगे। यह तय नहीं है कि पेशी शारीरिक रूप से होगी या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से, लेकिन एनआईए ने कोर्ट से 15 दिन की रिमांड मांगे जाने की तैयारी पूरी कर ली है।
एनआईए की योजना है कि कोर्ट की अनुमति मिलते ही तहव्वुर राणा को सीधे उनके मुख्यालय ले जाया जाएगा। वहां तीसरी मंजिल पर बने विशेष इन्वेस्टीगेशन सेल में उससे पूछताछ की जाएगी। यह सेल बेहद सुरक्षित है और इसमें केवल 12 अधिकारियों को ही प्रवेश की अनुमति है। इनमें एनआईए के डीजी सदानंद दाते, आईजी आशीष बत्रा और डीआईजी जया रॉय प्रमुख रूप से शामिल हैं। आज रात से ही तहव्वुर राणा से औपचारिक पूछताछ शुरू हो सकती है, जो कि 26/11 हमलों की साजिश और उसमें उसकी भूमिका को लेकर केंद्रित होगी।
एनआईए ने राणा की प्रत्यर्पण को लेकर आधिकारिक बयान भी जारी किया है। एजेंसी ने इसे एक “ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण” करार देते हुए कहा कि यह अमेरिका और भारत के बीच न्यायिक सहयोग की एक मिसाल है। एनआईए का कहना है कि राणा की भारत में मौजूदगी से 26/11 केस में न्याय की दिशा में एक ठोस प्रगति होगी और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज होगी। अमेरिकी न्याय विभाग ने भी इस प्रत्यर्पण को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि तहव्वुर राणा को भारत भेजना न्याय के लिए एक अहम कदम है और इससे 26/11 हमलों के पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होती है।



