Assam Flood 2025: असम में बाढ़ का कहर जारी: मामूली सुधार के बावजूद हालात गंभीर, मृतकों की संख्या 30 पहुंची
गुवाहाटी,असम में इस साल की विनाशकारी बाढ़ का प्रभाव अब भी गहराई से महसूस किया जा रहा है, हालांकि गुरुवार को स्थिति में कुछ मामूली सुधार देखने को मिला। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित जिलों की संख्या घटकर अब पाँच रह गई है, जो पहले छह थी। लेकिन इस राहत के बीच गोलाघाट जिले से एक और व्यक्ति की मौत की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी कुल मौतों की संख्या बढ़कर 30 हो चुकी है।
गोलाघाट जिला इस बाढ़ का सबसे बड़ा शिकार बना हुआ है। जिले के मोरोंगी राजस्व क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां अब तक 23,000 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। राज्य प्रशासन, एनडीआरएफ, स्थानीय स्वयंसेवकों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर बचाव और राहत कार्यों में जुटा है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ की गंभीरता को स्वीकार करते हुए ऊपरी असम में भारी वर्षा को इसका प्रमुख कारण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर कहा, “हमारी सरकार ज़मीनी स्तर पर मौजूद है और सभी प्रभावित लोगों के लिए त्वरित बचाव और पुनर्वास कार्य सुनिश्चित कर रही है। हम हर ज़रूरतमंद तक राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
वर्तमान में गोलाघाट, नागांव, होजई, कार्बी आंगलोंग और जोरहाट जिलों के 14 राजस्व क्षेत्रों में 175 गांव अभी भी जलमग्न हैं। इन इलाकों में बाढ़ ने लोगों को बुरी तरह प्रभावित किया है, और अब तक 5,000 से अधिक लोगों ने 38 राहत शिविरों में शरण ली है, जहां 24 राहत वितरण केंद्र लगातार भोजन, दवा और अन्य जरूरी सामग्री मुहैया करा रहे हैं।
खेती भी बाढ़ की मार से अछूती नहीं रही। अब तक 3,386 हेक्टेयर फसल भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा बाढ़ में 87 मवेशियों की मौत भी दर्ज की गई है।
राज्य के कई इलाकों में बुनियादी ढाँचा भी तबाह हो गया है। विशेषकर सड़कों, बिजली के खंभों और पुलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे आवागमन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। धनसिरी नदी का जलस्तर गोलाघाट और नुमालीगढ़ में अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
सरकारी तंत्र ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और आवश्यकता पड़ने पर ऊंचे स्थानों पर शरण लें। बाढ़ के खतरे को देखते हुए स्कूलों को बंद कर दिया गया है और कुछ इलाकों में जलजनित रोगों के फैलने की आशंका के मद्देनज़र चिकित्सा टीमें भी सक्रिय कर दी गई हैं।



