जामा मस्जिद प्रशासन ने आदेश जारी कर अकेले या समूह में आने वाली लड़कियों-महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश को लोग अलग-अलग तरीके से ले रहे हैं। वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इस फैसले पर विरोध जताया है। मालीवाल ने कहा है कि जितना हक एक पुरुष को इबादत का है उतना ही एक महिला को भी। मैं जामा मस्जिद के इमाम को नोटिस जारी कर रही हूं। इस तरह महिलाओं की एंट्री बैन करने का अधिकार किसी को नहीं है। मामला बढ़ता देख जामा मस्जिद के PRO अधिकारी ने कहा है कि महिलाओं की एंट्री पर रोक नहीं लगाई गई है। जब लड़कियां अकेले आती हैं, तब गलत काम होते हैं, वीडियो बनाए जाते हैं। परिवार या फिर शादी शुदा जोड़ों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। इसे मीटिंग प्वाइंट बनाया जाए, ये स्वीकार नहीं।
इससे पहले जामा मस्जिद की RWA के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सलमान ने कहा है कि बोर्ड में कुछ गलती थी। इस मामले में हम शाही इमाम से बात करने वाले हैं। समय रहते उस गलती को ठीक कर लिया जाएगा। अब क्या गलती, क्या चूक हुई, इसे लेकर मोहम्मद सलमान की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। सिर्फ इतना कहा गया कि गलती सुधार ली जाएगी। वैसे जिसे अब गलती बताया जा रहा है, कुछ घंटे पहले तक इस नए नियम की खुलकर पैरवी की जा रही थी।
विश्व हिंदू परिषद ने इस फरमान को ‘महिला विरोधी’ बताया है। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि ‘संविधान ने जो अधिकार दिए हैं, उनपर भी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। हरकत तो लड़के करते हैं और आप लड़कियों को कठघरे में खड़ा कर रहे हो!’



