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Rama Navami: रामनवमी पर सूर्य तिलक और दीपोत्सव से जगमगाई अयोध्या, भक्ति में डूबी नजर आई रामनगरी

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Rama Navami: रामनवमी पर सूर्य तिलक और दीपोत्सव से जगमगाई अयोध्या, भक्ति में डूबी नजर आई रामनगरी

रामनवमी के पावन अवसर पर अयोध्या नगरी भक्ति, आस्था और उल्लास की अनोखी छटा बिखेरती नजर आई। पूरे शहर को ऐसे सजाया गया था मानो स्वयं त्रेतायुग लौट आया हो और पूरी नगरी श्रीराम के स्वागत में रमा हो। रविवार को रामनवमी के दिन अयोध्या में प्रभु श्रीराम लला का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया गया। दोपहर 12:00 बजे जैसे ही श्रीराम का जन्म हुआ, ठीक उसी घड़ी सूर्य की किरणें प्रभु के ललाट पर पड़ीं और पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

सूर्य तिलक का यह दृश्य इतना अलौकिक था कि जिसने भी देखा, उसकी आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। बाल स्वरूप में विराजमान भगवान श्रीराम के ललाट पर जब सूर्यदेव की तेजस्वी रश्मियां प्रतिष्ठित हुईं, तब श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर जयघोष किया। जिन श्रद्धालुओं को अयोध्या आने का सौभाग्य नहीं मिला, उन्होंने टीवी व ऑनलाइन माध्यमों से सूर्य तिलक और राम जन्मोत्सव का सीधा प्रसारण देखकर अपनी आस्था प्रकट की।

अयोध्या में केवल राम जन्मभूमि मंदिर ही नहीं, बल्कि पांच हजार से अधिक मंदिरों—जैसे कनक भवन, दशरथ महल, हनुमानगढ़ी और अन्य ऐतिहासिक स्थलों—में भी राम जन्मोत्सव पूरे उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। 12 बजे जैसे ही भगवान का जन्म हुआ, पूरे शहर के मंदिरों में आरती और बधाइयों की गूंज सुनाई देने लगी। कनक भवन में जन्म की पारंपरिक बधाइयां गाई जा रही थीं, भक्तजन नाचते-गाते नजर आए, पूरा वातावरण राममय हो गया।

शाम होते ही अयोध्या का दृश्य और भी दिव्य हो गया। सरयू घाट पर करीब ढाई लाख दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया गया। दीपों की रोशनी में अयोध्या नगरी ऐसी लग रही थी जैसे स्वयं स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। हर तरफ रोशनी, भक्ति और राम नाम की गूंज थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रामपथ पर रेड कार्पेट बिछाया गया था और मंदिर परिसर में जगह-जगह शेड भी लगाए गए थे ताकि किसी को कोई असुविधा न हो।

इस पावन अवसर पर लगभग 15 लाख श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर श्रीराम लला के चरणों में शीश नवाया और राम जन्मोत्सव का साक्षात अनुभव किया। श्रद्धालुओं ने इस महापर्व को न केवल पूजा-पाठ और भक्ति के रूप में मनाया, बल्कि दीप जलाकर, भजन-कीर्तन कर और राम नाम का संकीर्तन करते हुए एक सजीव संस्कृति और परंपरा का सम्मान भी किया।

रामनवमी का यह पर्व अयोध्या में सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए आस्था, भावनाओं और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत प्रतीक बन गया है। सूर्य तिलक की दिव्यता और दीपोत्सव की भव्यता ने इसे ऐतिहासिक बना दिया है। अयोध्या नगरी इस दिन सचमुच प्रभु श्रीराम के स्वागत में दीपों की पंक्तियों से सजी एक दैवी नगरी के रूप में चमक रही थी, जहां हर दिशा से एक ही स्वर सुनाई दे रहा था—”जय श्रीराम!”

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