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पीएम मोदी ने ‘सेंटर-स्टेट साइंस कान्क्लेव’ का किया उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्र-राज्य विज्ञान सम्मेलन का उद्घाटन किया। पीएम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज 21वीं सदी के नए भारत के विकास के लिए विज्ञान सभी क्षेत्रों के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। देश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अपनी तरह का यह पहला कान्क्लेव केंद्र-राज्य समन्वय और सहयोग तंत्र को मजबूत करेगा।पीएम ने कहा कि जब ज्ञान और विज्ञान से हमारा मेल होता है तब संसार की सभी संकटों से मुक्ति का रास्ता अपने आप खुल जाता है। उन्होंने कहा कि समाधान और नवाचार का आधार विज्ञान ही है। इसी प्रेरणा से आज का नया भारत, जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के साथ ही जय अनुसंधान का आह्वान करते हुए आगे बढ़ रहा है।प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि इस अमृत काल में भारत को अनुसंधान और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अन्य राज्यों से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना चाहिए, चाहे वो विज्ञान संबंधी हो या कुछ और। पीएम मोदी ने कहा कि इस अमृतकाल में भारत को रिसर्च और इनोवेशन का ग्लोबल सेंटर बनाने के लिए हमें एक साथ अनेक मोर्चों पर काम करना है। अपनी साइंस और टेक्नॉलॉजी से जुड़ी रिसर्च को हमें लोकल स्तर पर लेकर जाना है। नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकारों को ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक संस्थानों के निर्माण पर और प्रक्रियाओं को सरल करने पर बल देना चाहिए। राज्यों में जो उच्च शिक्षा के संस्थान हैं, उनमें नवाचार प्रयोगशालाओं की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। अगर हम पिछली शताब्दी के शुरुआती दशकों को याद करें तो पाते हैं कि दुनिया में किस तरह तबाही और त्रासदी का दौर चल रहा था। लेकिन उस दौर में भी बात चाहे पूर्व की हो या पश्चिम की, हर जगह के वैज्ञानिक अपनी महान खोज में लगे हुए थे। पश्चिम में आइंस्टाइन, फर्मी, मैक्स प्लांक, नील्स बोर, टेस्ला जैसे वैज्ञानिक अपने प्रयोगों से दुनिया को चौंका रहे थे। उसी दौर में सीवी रमन, जगदीश चंद्र बोस, सत्येंद्रनाथ बोस, मेघनाद साहा, एस चंद्रशेखर समेत कई वैज्ञानिक अपनी नई-नई खोज सामने ला रहे थे।

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