Foreign Currency Savings: प्रधानमंत्री की अपील से देश की विदेशी मुद्रा बचत और,आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलेगी : विनोद जायस
नई दिल्ली,(रविंद्र कुमार):देश में बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा क्षेत्र में उतार-चढ़ाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई हालिया अपील को एक महत्वपूर्ण आर्थिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इस अपील में नागरिकों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, सोने जैसी आयात आधारित वस्तुओं की खरीद में संयम बरतने तथा घरेलू उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है, जिसका उद्देश्य देश की विदेशी मुद्रा बचत और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है। उत्तर पूर्वी जिला भाजपा के उपाध्यक्ष ठाकुर विनोद जायस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी प्रयास है। उनके अनुसार पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचाव और सोने जैसी आयात आधारित वस्तुओं पर नियंत्रण जैसे सुझाव आम नागरिकों को आर्थिक रूप से जागरूक करने का कार्य करेंगे तथा इससे देश की विदेशी मुद्रा बचत और आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि वे निजी वाहनों के उपयोग में कमी लाकर सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं, कारपूलिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा दें और ईंधन की बचत को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, जिससे न केवल आयात बिल में कमी आएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
इसी क्रम में उन्होंने सोने की अनावश्यक खरीद पर रोक लगाने और विशेष रूप से बड़े आयोजनों में अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी है, क्योंकि सोने का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर होने के कारण यह विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा प्रभाव डालता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने नागरिकों से यह भी कहा है कि वे अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचें और देश के भीतर पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दें, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। डेस्टिनेशन वेडिंग और बड़े विदेशी आयोजनों पर खर्च को भी देश के भीतर ही करने की भावना को प्रोत्साहित किया गया है। विनोद जायस कहते हैं सरकार की इस अपील में “वोकल फॉर लोकल” की भावना को भी प्रमुखता दी गई है, जिसके तहत स्थानीय उत्पादों को अपनाने, भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है। इस पूरे संदेश को एक व्यापक आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत को आत्मनिर्भर और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है।



