Odissi Dancer Death: प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना मधुमिता राउत का निधन, 59 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट
नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत को बड़ा झटका लगा है। प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना मधुमिता राउत का शनिवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से 59 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और देश-विदेश के कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
मधुमिता राउत, ओडिसी नृत्य के महान गुरु मयाधर राउत की पुत्री थीं। मयाधर राउत ने 1950 के दशक में शास्त्र आधारित ज्ञान के साथ ओडिसी नृत्य के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मधुमिता राउत ने ओडिसी को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया।
उन्होंने अपने लंबे करियर में भारत के साथ-साथ आयरलैंड, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, नीदरलैंड, जर्मनी, बेल्जियम, हंगरी, ऑस्ट्रिया, स्पेन, मोरक्को, फ्रांस, पुर्तगाल, जापान और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिष्ठित नृत्य महोत्सवों में अपनी प्रस्तुतियां दीं। उनकी प्रस्तुतियों में शास्त्रीयता के साथ नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिलता था, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।
मधुमिता राउत की विशेषता उनकी कोरियोग्राफी में भी झलकती थी। उन्होंने कविता आधारित प्रस्तुतियों के साथ-साथ जर्मन साहित्यकार गोएथे की कविताओं पर भी नृत्य रचनाएं तैयार कीं। इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड में बाली की नृत्यांगना दिया तंत्रि के साथ फ्यूजन डांस कर भारतीय शास्त्रीय नृत्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दी।
वह केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि समाज से जुड़े मुद्दों को भी अपने नृत्य के माध्यम से उठाने वाली संवेदनशील व्यक्तित्व थीं। उन्होंने कई सामाजिक विषयों पर अपनी प्रस्तुतियों के जरिए जागरूकता फैलाने का प्रयास किया।
मधुमिता राउत को ओडिसी नृत्य के प्रचार-प्रसार और उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से भारतीय सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।



