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Krishna Janmabhoomi Silver Shila: अयोध्या में रजत शिला का पूजन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए ब्रज रवाना; वृंदावन में होगा भव्य स्वागत

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Krishna Janmabhoomi Silver Shila: अयोध्या में रजत शिला का पूजन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए ब्रज रवाना; वृंदावन में होगा भव्य स्वागत

अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान को लेकर संतों और हिंदू पक्ष से जुड़े लोगों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए तैयार कराई गई रजत शिला का शनिवार को अयोध्या में विधि-विधान से पूजन कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने रजत शिला का सांकेतिक पूजन किया और अभियान की सफलता के लिए आशीर्वाद दिया। अयोध्या में पूजन के बाद अब इस शिला को ब्रजभूमि ले जाया जा रहा है।

इस आयोजन को राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुए शिला पूजन की परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। राम मंदिर निर्माण से पहले मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे दिगम्बर अखाड़ा के तत्कालीन महंत रामचंद्र दास परमहंस ने शिला पूजन किया था। अब उसी परंपरा से प्रेरणा लेते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान के लिए रजत शिला का पूजन कराया गया है।

हालांकि राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुए शिला पूजन और वर्तमान आयोजन की परिस्थितियां अलग हैं। रामचंद्र दास परमहंस ने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में शिला दान की घोषणा की थी, जबकि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े इस कार्यक्रम की घोषणा ब्रजभूमि के संतों की ओर से नौ अगस्त को की गई थी।

ब्रजभूमि से हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी की अगुवाई में श्रद्धालुओं का एक दल रजत शिला लेकर अयोध्या पहुंचा। शनिवार को श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पूर्णिमा के अवसर पर सरयू नदी में स्नान किया। इसके बाद सरयू तट पर रजत शिला का विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया।

सरयू तट पर धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद श्रद्धालु रजत शिला को लेकर अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी पहुंचे। यहां शिला को हनुमान जी के समक्ष अर्पित किया गया और धार्मिक परंपरा के अनुसार आगे के अभियान के लिए उनका आशीर्वाद लिया गया।

इसके बाद रजत शिला को श्रीराम जन्मभूमि की चौखट तक ले जाया गया। श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान की सफलता के लिए प्रार्थना की। रामलला के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं का दल रजत शिला लेकर मणिराम छावनी पहुंचा।

मणिराम छावनी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के हाथों रजत शिला का सांकेतिक पूजन कराया गया। महंत नृत्यगोपाल दास ने शिला का स्पर्श कर पूजा-अर्चना की और वहां मौजूद श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।

मणिराम छावनी के संत और महंत नृत्यगोपाल दास के निजी सहायक जानकी दास ने भी कार्यक्रम की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े श्रद्धालु अपने साथ रजत शिला लेकर अयोध्या आए थे। महंत नृत्यगोपाल दास ने शिला का स्पर्श कर उसका पूजन किया और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान की सफलता के लिए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया।

हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी के मुताबिक, इस रजत शिला को केवल अयोध्या और ब्रजभूमि तक सीमित रखने की योजना नहीं है। इसे ब्रजभूमि के विभिन्न धार्मिक स्थलों के साथ देश के प्रमुख मंदिरों और बड़ी संख्या में गांवों तक ले जाकर पूजन कराने की योजना बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि ब्रजभूमि सहित देश के प्रमुख मंदिरों और एक लाख से अधिक गांवों में रजत शिला के पूजन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बृज धर्माचार्य परिषद के महामंत्री पंडित राजेश पाठक को अभियान का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

अभियान के प्रभारी राजेश पाठक के अनुसार, एक सितंबर को रजत शिला विशेष वाहन से ब्रजभूमि में प्रवेश करेगी। शिला के आगमन को लेकर रास्ते में विभिन्न स्थानों पर स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं की ओर से शिला के स्वागत के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

ब्रजभूमि पहुंचने के बाद रजत शिला को सबसे पहले श्रीधाम वृंदावन ले जाया जाएगा। यहां धार्मिक अनुष्ठानों और पूजन के बाद इसे आगे के निर्धारित स्थानों तक ले जाने की तैयारी है। आयोजकों की योजना इस अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक मंदिरों और गांवों को श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े धार्मिक अभियान से जोड़ने की है।

अयोध्या में हुए रजत शिला पूजन का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि इसका पूजन महंत नृत्यगोपाल दास ने किया। वह लंबे समय से अयोध्या और ब्रजभूमि दोनों की धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं।

महंत नृत्यगोपाल दास का ब्रजभूमि और जन्माष्टमी से पुराना संबंध रहा है। वह हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के लिए जाते रहे हैं। पांच अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के बाद भी वह जन्माष्टमी मनाने ब्रज गए थे।

उसी दौरान वह कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बाद से उनका स्वास्थ्य पहले जैसा नहीं रहा। हालांकि वह लगातार स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, लेकिन उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के कारण उनके सार्वजनिक कार्यक्रम सीमित हो गए हैं।

उनके उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास के अनुसार, महंत नृत्यगोपाल दास की जन्माष्टमी पर ब्रज जाने की पुरानी परंपरा रही है। इस बार भी उनकी यात्रा की संभावना उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करेगी। फिलहाल इस संबंध में कार्यक्रम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी रजत शिला का अयोध्या में सरयू तट से लेकर हनुमानगढ़ी, श्रीराम जन्मभूमि और मणिराम छावनी तक पूजन कराया जाना आयोजकों की ओर से इस अभियान के महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।

अब इस धार्मिक अभियान का अगला प्रमुख पड़ाव ब्रजभूमि होगा। एक सितंबर को विशेष वाहन से शिला के ब्रज में प्रवेश करने और सबसे पहले वृंदावन ले जाए जाने की तैयारी है। इसके बाद आयोजकों की योजना देश के प्रमुख मंदिरों और एक लाख से अधिक गांवों तक रजत शिला के पूजन अभियान को पहुंचाने की है।

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