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Kiren Rijiju on Regime Change: ‘भारत बांग्लादेश नहीं है’, रिजीम चेंज की मांग पर किरेन रिजिजू का विपक्ष को जवाब; नेहा बोरा और प्रशांत भूषण के बयान पर बढ़ा विवाद

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Kiren Rijiju on Regime Change: ‘भारत बांग्लादेश नहीं है’, रिजीम चेंज की मांग पर किरेन रिजिजू का विपक्ष को जवाब; नेहा बोरा और प्रशांत भूषण के बयान पर बढ़ा विवाद

केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने भारत में ‘रिजीम चेंज’ यानी सरकार बदलने की मांग को लेकर विपक्ष और आंदोलन से जुड़े लोगों पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भारत बांग्लादेश नहीं है और भारतीय युवा देश को बनाने का काम करेंगे, उसे बर्बाद करने का नहीं। रिजिजू की यह प्रतिक्रिया छात्र नेता नेहा बोरा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के हालिया बयानों के बाद सामने आई है। इन बयानों को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

रिजिजू ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय युवा मूर्ख नहीं हैं और वे देश के निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे खेल, कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है, जबकि भाजपा इन प्रदर्शनों और उनसे जुड़े कुछ बयानों को लेकर सवाल उठा रही है।

विवाद की शुरुआत उस समय तेज हुई, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के Gen-Z छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए वहां के युवाओं के प्रति एकजुटता जताई। 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के सम्मेलन के लिए जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था कि भारत में दिखाई दे रहे युवा आंदोलन को बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा मिली है। उन्होंने बांग्लादेश के युवाओं की ओर से रास्ता दिखाने और लोकतंत्र तथा मताधिकार के लिए संघर्ष करने का उल्लेख किया। भाजपा ने उनके बयान को भारत में भी बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की राजनीति से जोड़कर आलोचना की, जबकि आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगें लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से संबंधित हैं।

इसके अगले दिन, 15 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ‘रिजीम चेंज’ की बात कही। उन्होंने मौजूदा सरकार की नीतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर आलोचना करते हुए सरकार बदलने की मांग को नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया। उनके बयान के बाद भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष और उससे जुड़े संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय सड़कों पर आंदोलन के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सरकार बदलने की मांग और उसके लिए अपनाए जाने वाले तरीकों के बीच अंतर को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सहित अन्य नेताओं ने भी इन बयानों पर आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का कहना है कि सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव और जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अव्यवस्था के जरिए। वहीं कांग्रेस ने जवाब में कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार का विरोध करना, उसकी नीतियों पर सवाल उठाना और चुनाव के माध्यम से उसे सत्ता से हटाने का प्रयास करना है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी 16 अक्टूबर को इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी सरकार को चुनाव में हराकर सत्ता से हटाना और व्यवस्था में बदलाव लाना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में सरकार बदलने का रास्ता चुनावी प्रक्रिया से होकर गुजरता है। कांग्रेस की ओर से यह तर्क दिया गया कि सत्ता परिवर्तन की मांग अपने आप में अलोकतांत्रिक नहीं है और विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने नेहा बोरा और प्रशांत भूषण के बयानों को जोड़ते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन को बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है।

इस विवाद का संबंध दिल्ली में चल रहे उन प्रदर्शनों से भी है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष की आलोचना कर रही है। फिलहाल ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल और बांग्लादेश के युवा आंदोलन से प्रेरणा लेने संबंधी बयानों ने देश में लोकतांत्रिक विरोध, चुनावी जवाबदेही और राजनीतिक आंदोलनों की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी है।

 

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