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Middle East Tension: लेबनान पर इस्राइली हमलों से बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया पर संकट के बादल

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Middle East Tension: लेबनान पर इस्राइली हमलों से बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया पर संकट के बादल

तेहरान/बेरूत। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच 111 दिनों तक चले संघर्ष के बाद युद्ध समाप्त करने को लेकर हुए समझौते पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस्राइल द्वारा दक्षिणी लेबनान में किए गए ताजा हवाई हमलों के बाद क्षेत्रीय हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस्राइली हमलों के जवाब में हिजबुल्ला ने भी जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पूरे क्षेत्र में नई सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में युद्ध समाप्त करने और तनाव कम करने के उद्देश्य से एक समझौता हुआ था। इस समझौते को लेकर उम्मीद जताई जा रही थी कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी अस्थिरता को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि इस्राइल ने इस समझौते पर अपनी असहमति जताई है और उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

इसी बीच शुक्रवार रात इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में कई ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले रातभर जारी रहे और ड्रोन तथा अन्य सैन्य साधनों का इस्तेमाल किया गया। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार हमलों में कई रिहायशी और संवेदनशील क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा है।

लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है, जबकि 33 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रहे हैं और घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। हमलों के बाद दक्षिणी लेबनान के कई क्षेत्रों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

इस्राइली कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में प्रस्तावित वार्ता की तैयारियां चल रही थीं। दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत को क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि ताजा घटनाक्रम के बाद यह वार्ता फिलहाल टल गई है। अमेरिकी प्रशासन ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी कहा है कि नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई थी। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। समझौते के तहत शुरुआती 60 दिनों तक जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के सुरक्षित मार्ग देने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि भविष्य में ईरान द्वारा इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बनी हुई हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है, जिससे वैश्विक तेल, शिपिंग और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ईरान, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के बीच होने वाली वार्ताएं होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य और समुद्री प्रशासन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस कारण दुनिया भर की ऊर्जा कंपनियां और शिपिंग उद्योग इन घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

पश्चिम एशिया में पिछले साढ़े तीन महीनों से जारी तनाव के बीच लेबनान पर हुए ताजा हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।

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