Delhi Building Collapse: दिल्ली में इमारतें नहीं, निगम का भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था ढह रही है : श्याम सुन्दर अग्रवाल
नई दिल्ली (स्पर्श भारद्वाज): दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित गली शीश महल में तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने से दो लोगों की दर्दनाक मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर राजधानी में भवन निर्माण से जुड़े सुरक्षा इंतजामों और दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे पर दिल्ली के पूर्व महापौर श्याम सुन्दर अग्रवाल ने गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि राजधानी में लगातार हो रहे इमारतों के गिरने के हादसे इस बात का संकेत हैं कि दिल्ली नगर निगम का बिल्डिंग विभाग और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
श्याम सुन्दर अग्रवाल ने निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर संजीव खिरवार बिल्डिंग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों में कथित रूप से व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में लगातार इमारतों के गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है और कई लोग घायल हो रहे हैं। इसके बावजूद हादसों के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के बजाय केवल छोटे कर्मचारियों को निलंबित करके मामले को समाप्त करने का प्रयास किया जाता है।
पूर्व महापौर ने मांग की कि दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर संजीव खिरवार को तत्काल उनके पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निगम की जिम्मेदारी ऐसे ईमानदार, मेहनती, जवाबदेह और जनहित के प्रति समर्पित अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए, जो विभागों में कथित रूप से फैले भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सके। साथ ही भवन निर्माण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कर दिल्लीवासियों की जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
श्याम सुन्दर अग्रवाल ने कहा कि संजीव खिरवार के कार्यकाल के दौरान सामने आए छह बड़े इमारत गिरने के हादसों का विवरण बेहद चिंताजनक है। इन घटनाओं में कुल 23 लोगों की मौत और लगभग 30 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि जब लगातार इस तरह की घटनाएं हो रही हों और उनमें लोगों की जान जा रही हो, तब निगम प्रशासन को केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही सतर्कता और निगरानी की मजबूत व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली में पुराने और जर्जर भवनों के साथ-साथ निर्माणाधीन इमारतों की भी नियमित जांच होनी चाहिए। अवैध निर्माण, भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन और लापरवाही के मामलों में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल कर्मचारियों के निलंबन से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासियों की सुरक्षा से जुड़ा यह विषय बेहद गंभीर है और निगम प्रशासन को इसे राजनीतिक बयानबाजी या औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहिए।





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