India-Pakistan Conflict: सीजफायर के बाद प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण बैठक, सुरक्षा स्थिति की समीक्षा
भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण बैठक की जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सीजफायर के बाद की स्थिति का आकलन करना था, साथ ही पाकिस्तान की ओर से किसी भी संभावित उल्लंघन से निपटने के लिए रणनीति तैयार करना था।
बैठक के दौरान भारतीय सुरक्षा अधिकारियों ने पाकिस्तान की ओर से सीमा पर स्थिति और सैन्य गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण किया। बैठक में यह भी चर्चा की गई कि अगर पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन करता है तो भारत को किस प्रकार की सैन्य और कूटनीतिक प्रतिक्रिया देनी चाहिए। भारत की सुरक्षा और देशवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, बैठक में भविष्य की संभावित चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतियों पर भी विचार किया गया।
वही इस पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव कहते हैं, “इस संघर्ष में, जो लगातार जारी था, एक ऐसा मोड़ आना तय था जब अमेरिका को हस्तक्षेप करना पड़ता या पाकिस्तान चाहता कि अमेरिका उससे मदद मांगे ताकि बढ़ते संघर्ष में दखल दिया जा सके। मेरा मानना है कि यह मोड़ कल आ गया, और पाकिस्तान ने बेहद हताशा में अमेरिका से संपर्क किया। पाकिस्तान ने जो नैरेटिव अमेरिका के सामने रखा, वह यह था कि यह टकराव बड़े युद्ध में बदल सकता है और हमारे पास परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा, जिससे लाखों लोग मारे जाएंगे।
दूसरा नैरेटिव जो पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने रखा वह यह था कि अगर भारत ने और बड़ा हमला किया तो हमारी सेना और हमारे संस्थान टूट जाएंगे। और यह बहुत संभव है कि हमारे परमाणु हथियार गैर-राज्य तत्वों के हाथ लग जाएं। मिस्टर अमेरिका, क्या आप चाहते हैं कि हमारे परमाणु हथियार इस क्षेत्र में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा डर्टी बम बनाने में इस्तेमाल हों, और ये मध्य पूर्व तक या यहां तक कि अमेरिका तक पहुंच जाएं?…”



