Himachal Flash Flood 2025: हिमाचल में बादल फटने और बारिश से तबाही, 30 घंटे में 10 मौतें, मंडी में 34 लापता, 406 सड़कें ठप, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हिमाचल प्रदेश इस समय भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। बीते 30 घंटों की मूसलधार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने राज्य के कई जिलों में तबाही मचा दी है। मंडी, चंबा, हमीरपुर और अन्य क्षेत्रों से लगातार तबाही की खबरें आ रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की बुधवार सुबह 9 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस भयावह आपदा में अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अकेले मंडी जिले में 34 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
सबसे अधिक तबाही मंडी जिले में
राज्य राजस्व विभाग के विशेष सचिव दुनी चंद राणा ने बताया कि मंडी सबसे अधिक प्रभावित जिला है। यहां गोहर, करसोग और धर्मपुर उपमंडलों में बादल फटने, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की कई घटनाएं हुईं। मंडी के गोहर के स्यांज, बड़ा गोहर, करसोग के पुराना बाजार, थुनाग, धार जरोल और जोगिंदरनगर से मौतें रिपोर्ट हुई हैं। केवल गोहर उपमंडल में ही दो परिवारों के नौ लोग लापता हैं, जिनमें से दो शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में पदम सिंह (75), देवकू देवी (70), झाबे राम (50), पार्वती देवी (47), सुरमि देवी (70), इंद्र देव (29), उमावती (27), कनिका (9) और गौतम (7) शामिल हैं।
विनाश का भयावह स्वरूप
अब तक मंडी, चंबा और हमीरपुर जिलों से कुल 333 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के चलते 24 घर और 12 गोशालाएं पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं, जबकि 30 पशु मारे गए हैं। मंडी शहर में जलभराव के चलते लोगों को गुरुद्वारा और विपाशा सदन में बनाए गए राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। मंडी-मनाली नेशनल हाईवे पर सुरंग संख्या 11 और 13 के पास भूस्खलन में फंसे लोगों को रात भर चलाए गए रेस्क्यू अभियान से सुरक्षित निकाला गया।
400 से ज्यादा सड़कें बंद, बिजली-पानी संकट
राज्य में अब तक 406 सड़कों पर आवाजाही बंद हो चुकी है, जिनमें अकेले मंडी में 248 सड़कें शामिल हैं। शिमला, कांगड़ा, सिरमौर, कुल्लू, चंबा, ऊना, सोलन और किन्नौर जिलों में भी सड़कें अवरुद्ध हैं। प्रदेश भर में 1515 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो चुके हैं, जिनमें 900 से अधिक मंडी जिले में हैं। जलापूर्ति की 171 परियोजनाएं भी बंद पड़ी हैं, जिससे कई गांवों और कस्बों में जल संकट गहरा गया है।
रेस्क्यू में लगीं NDRF और SDRF की टीमें
गोहर उपमंडल के स्यांज क्षेत्र में दो परिवारों के नौ लोग लापता हैं। यहां NDRF और SDRF की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। धर्मपुर के लौंगणी, करसोग और थुनाग क्षेत्र में भी टीमें तैनात की गई हैं। मंडी से अब तक 287 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। राहत शिविरों में भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
11 दिनों में 51 मौतें, अलर्ट जारी
प्रदेश में पिछले 11 दिनों में भारी बारिश के कारण 51 लोगों की जान जा चुकी है और छह लोग अब भी लापता हैं। 13 घंटे की लगातार बारिश ने 1 जुलाई को सबसे बड़ा कहर ढाया। अब तक 9 पक्के और 4 कच्चे घर पूरी तरह ढह चुके हैं, जबकि 35 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। 9 दुकानें और 41 गोशालाएं भी नष्ट हो चुकी हैं।
प्रशासन की अपील और अलर्ट
राज्य सरकार ने आपातकालीन स्थिति में संपर्क के लिए 1070 और 1077 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे ‘सचेत’ मोबाइल ऐप इंस्टॉल करें ताकि आपदा से जुड़ी चेतावनियां समय पर मिल सकें। पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी है और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं।


