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 ED Raids: आंध्र की नई शराब नीति बनी घोटाले का जरिया, ED की जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुलीं

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 ED Raids: आंध्र की नई शराब नीति बनी घोटाले का जरिया, ED की जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुलीं

मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए ED ने हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तंजावुर, सूरत, रायपुर, दिल्ली-एनसीआर और आंध्र प्रदेश में 20 जगहों पर छापेमारी की और फर्जी कंपनियों का खुलासा किया. आंध्र प्रदेश शराब घोटाले के मामले में ED ने गुरुवार (18 सितंबर, 2025) को बड़ी कार्रवाई की. ED ने हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तंजावुर, सूरत, रायपुर, दिल्ली-एनसीआर और आंध्र प्रदेश में 20 जगहों पर छापेमारी की. ये छापे उन कंपनियों और लोगों के घर में हुए, जिन्होंने फर्जी लेन-देन और नकली बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये की किकबैक दी थी. ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई. ED ने ये जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. इस एफआईआर में कहा गया था कि सरकार को करीब 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने 5 फरवरी 2025 को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई थी. शिकायत के मुताबिक, अक्टूबर 2019 से मार्च 2024 तक लागू की गई नई शराब नीति में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई. लोकप्रिय शराब ब्रांड जैसे McDowell’s, Royal Stag, Imperial Blue वगैरह को जानबूझकर बाजार से बाहर किया गया. उनकी जगह नए और घटिया ब्रांड्स को बढ़ावा दिया गया, लेकिन इसके बदले में कंपनियों से भारी रकम वसूली गई. पहले शराब सप्लाई का सिस्टम ऑटोमैटिक था, लेकिन उसे मैनुअल किया गया, ताकि सप्लाई ऑर्डर में हेरफेर हो सके. SIT और ED की जांच में सामने आया कि कंपनियों से 15–20% तक किकबैक मांगी गई. जो ऐसा नहीं करते थे,

उनकी ब्रांड को लिस्ट से हटा दिया जाता था. फर्जी डिस्टिलरी बनाकर वहां से बड़े पैमाने पर फर्जी सप्लाई और लेन-देन दिखाए गए. सरकार से मिलने वाली असली पेमेंट का कुछ हिस्सा फर्जी कंपनियों और शेल कंपनियों को भेजा गया. कई कंपनियों ने पैसे को जूलर्स के जरिए सोना और नकद में बदलकर नेताओं और अफसरों तक पहुंचाया. इन पैसों का इस्तेमाल चुनाव और निजी फायदे के लिए किया गया. ED की मनी ट्रेल जांच में सामने आया कि सरकारी कंपनी APSBCL (Andhra Pradesh State Beverages Corporation Limited) से जो पेमेंट हुई, उसका बड़ा हिस्सा फर्जी बिलों और लेन-देन के जरिए घोटालेबाजों तक पहुंचा. जांच में फर्जी इनवॉइस, फर्जी ट्रांसपोर्ट चालान, चैट मैसेज और अरबों की रकम विदेश भेजे जाने के सबूत मिले. छापों में एक जगह से 38 लाख रुपये नकद बरामद हुए. कई दस्तावेजों में दुबई बैठे आरोपियों को पैसे भेजने का भी खुलासा हुआ है. ED ने कहा है कि अभी जांच जारी है.

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