प्रदूषण पर करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं हो पाती दिल्ली की हवा साफ़ : महेंद्र भास्कर
नई दिल्ली, (रविंद्र कुमार): दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे दावों के बीच कांग्रेस ने राजधानी की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। करोलबाग जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र भास्कर ने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद दिल्ली की हवा अक्सर प्रदूषित रहती है | सर्दी के मौसम में हालात बेकाबू हो जाते हैं | और राजधानी लगातार प्रदूषित शहरों की सूची में बनी हुई है। महेंद्र भास्कर ने कहा कि सरकार द्वारा प्रदूषण से निपटने के लिए नई-नई योजनाओं, तकनीकी व्यवस्थाओं और निगरानी तंत्र की घोषणा की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार संसाधन और धन खर्च किया जा रहा है तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि उसका वास्तविक परिणाम दिल्ली की जनता को क्यों नहीं मिल रहा है।उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल कमांड सेंटर बनाने, बैठकें करने और योजनाओं की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, सड़कों की खराब स्थिति, खुले में कूड़ा जलाने और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार की घोषणाओं और जमीनी स्थिति के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता हर साल प्रदूषण के बढ़ते स्तर का सामना करती है और इसके कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार को केवल आंकड़ों और तकनीकी निगरानी की बात करने के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदूषण कम करने के लिए जमीनी स्तर पर कितनी कार्रवाई हुई और उसका क्या परिणाम सामने आया। महेंद्र भास्कर ने सरकार से प्रदूषण नियंत्रण पर किए जा रहे खर्च और उसके परिणामों का सार्वजनिक विवरण सामने रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली को स्वच्छ हवा दिलाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था, नियमित निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। उनका कहना था कि प्रदूषण को लेकर जनता को केवल दावों के बजाय धरातल पर दिखाई देने वाले ठोस परिणाम चाहिए।



