नीतियां बनाने से नहीं, जमीन पर कार्रवाई से सुरक्षित होंगे दिल्ली के भवन : ज्योति रानी
नई दिल्ली, (रविंद्र कुमार): राजधानी में लगातार सामने आ रहे भवन हादसों और उनके बाद शुरू होने वाली सरकारी कवायद के बीच आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। भवन सुरक्षा के लिए नई नीतियां और दिशा-निर्देश तैयार करना जरूरी है, लेकिन केवल कागजों पर नीति बना देने से हादसों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। नीतियों को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू करना और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है। यह कहना है आम आदमी पार्टी की विश्वास नगर वार्ड की निगम पार्षद ज्योति रानी का। ज्योति रानी ने भवन सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजधानी में भवनों की सुरक्षा कोई नया विषय नहीं है। नगर निगम और संबंधित विभागों के पास निरीक्षण, नोटिस, कार्रवाई और निगरानी के लिए पर्याप्त संसाधन और व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि जर्जर, असुरक्षित या नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए भवन लंबे समय तक कार्रवाई से बचे रहते हैं तो समस्या संसाधनों की कमी से अधिक सिस्टम के खराब होने की है। उन्होंने कहा कि किसी बड़े हादसे के बाद अधिकारियों का मौके पर पहुंचना, जांच के आदेश देना और कुछ भवनों पर कार्रवाई करना स्थायी समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि संभावित खतरनाक भवनों की पहचान हादसे से पहले की जाए। नियमित निरीक्षण, स्ट्रक्चरल ऑडिट और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई को महज औपचारिकता न बनाकर वास्तविक व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए। आप पार्षद ने कहा कि राजधानी में बड़ी संख्या में पुराने मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गोदाम, पीजी, कोचिंग सेंटर और अन्य सार्वजनिक उपयोग की इमारतें हैं। इनमें रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा से जुड़ी छोटी सी लापरवाही भी कभी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को केवल फाइलों और रिपोर्टों के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर भवनों की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए। ज्योति रानी ने कहा कि नीतियां बनाना अच्छी शुरुआत हो सकती है, लेकिन उनका असर तभी दिखाई देगा जब अधिकारी और कर्मचारी उन्हें धरातल पर लागू करें। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी इलाके में वर्षों से अवैध निर्माण या जर्जर भवन की शिकायतें आती रही हैं और फिर भी कार्रवाई नहीं होती तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा। उन्होंने कहा कि भवन सुरक्षा के मामले में नगर निगम, डीडीए, दिल्ली अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। एक विभाग द्वारा दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डालने के बजाय शिकायत मिलने से लेकर कार्रवाई पूरी होने तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार भवन सुरक्षा की प्रस्तावित नई व्यवस्था में नियमित निरीक्षण, संरचनात्मक सुरक्षा जांच, अग्नि सुरक्षा, अवैध निर्माण की निगरानी और नागरिक शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को स्पष्ट रूप से शामिल करे। साथ ही, अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो ताकि लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जा सके।



