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Delhi Waterlogging: जलभराव से निपटने के दावों की पोल खुल रही है रोजाना सड़कों पर पानी और जनता बेहाल : महेंद्र भास्कर

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Delhi Waterlogging: जलभराव से निपटने के दावों की पोल खुल रही है रोजाना सड़कों पर पानी और जनता बेहाल : महेंद्र भास्कर

नई दिल्ली (रविंद्र कुमार ) :दिल्ली में लगातार हो रही बारिश के बीच विभिन्न इलाकों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति ने एक बार फिर राजधानी में जल निकासी व्यवस्था और सरकारी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जगह-जगह जमा पानी के कारण आम लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर करोलबाग जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र भास्कर ने दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बारिश से पहले तैयारियों को लेकर किए जाने वाले दावे जमीन पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। महेंद्र भास्कर ने कहा कि हर वर्ष बारिश शुरू होने से पहले सरकार और संबंधित विभाग जलभराव रोकने, नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में इन दावों की वास्तविकता सामने आ जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी के अनेक हिस्सों में सड़कों पर घंटों पानी जमा रहना इस बात का प्रमाण है कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बारिश दिल्ली के लिए नई समस्या नहीं है, इसके बावजूद हर मानसून में वही तस्वीर दोहराई जाती है। कहीं सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं तो कहीं जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार थम जाती है। पैदल चलने वालों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
कई स्थानों पर पानी दुकानों और घरों के आसपास तक पहुंचने से स्थानीय कारोबार भी प्रभावित होता है। कांग्रेस नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार की तैयारियां शायद कागजों और बैठकों तक ही सीमित हैं। जमीन पर स्थिति यह है कि बारिश होते ही नालियां और जल निकासी मार्ग जवाब देने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने और व्यापक तैयारियों के दावे करने के बावजूद लोगों को जलभराव से राहत नहीं मिल रही है तो सरकार और संबंधित एजेंसियों को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए महेंद्र भास्कर ने कहा कि दिल्ली सरकार, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जलभराव को केवल बारिश की समस्या बताकर जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं है। नालों की नियमित सफाई, जल निकासी की क्षमता बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों की पहचान करने और पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बारिश से पहले बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं तो करती है, लेकिन उन दावों की जमीनी निगरानी नहीं की जाती। यही वजह है कि बारिश होते ही राजधानी के कई प्रमुख मार्गों और रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने कहा कि जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा ठोस इंतजाम चाहिए जिससे हर वर्ष बारिश के दौरान उसे उन्हीं परेशानियों से दोबारा न गुजरना पड़े।

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