Delhi Pollution: सबोली-मंडोली रेजिडेंटस का दम घोंट रही हैं रिसाइकिल फैक्ट्रियां
शाम होते ही कॉलोनियां धुंआ धुंआ, हवा में घुल रहा है जहर
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : सूरज ढलते ही न्यू मंडोली इंडस्ट्रीयल एरिया की अवैध फैक्ट्रीयों के कारण सबोली-मंडोली क्षेत्र की दर्जनों कॉलोनियों में आसमान में सिर्फ धुंआ ही धुंआ नजर आता है यह धुआँ स्याह काला और जहरीला होता है। जिसकी वजह से क्षेत्र के रेजिडेंटस को सांस लेने में दम घुटने लगता है। यह धुआँ शासन और प्रशासन की मिलीभगत से सबोली-मंडोली सेवाधाम इंडस्ट्रीयल एरिया में 60 से 70 अवैध चल रही फैक्ट्रियों के मालिक एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए जिनमे निकिल व स्क्रैप, पॉल्युशन फैलाने वाली फैक्ट्रीयां, स्क्रैप गलाने के लिए व कोपर एल्युमिनियम रिसाइकिल करने के लिए टायर जलाने वाली फैक्ट्रियां, ढलाई फैक्ट्रियां, निकिल पोलिश व जहरीले कैमिकल का इस्तेमाल करने वाली फैक्ट्रियां आदि-आदि अवैध फैक्ट्रियां हैं जिनकी वजह से हवा में जहर घुलता है जिससे सामान्य आदमी का भी सांस लेने में दम घुटता है।
यमुनापार युनाइटेड आरडब्ल्यूए फेडरेशन के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने बताया कि हमने दिल्ली मुख्यमंत्री, दिल्ली उपराज्यपाल, एनजीटी, दिल्ली नगर निगम, सांसद लोकसभा नोर्थ-ईस्ट दिल्ली, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, डीसीपी नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट, डीएम, एसडीएम व थानाध्यक्ष हर्ष विहार को अनेकों लिखित शिकायतें की हैं। अवैध इंडस्ट्रियल एरिया को कोई भी मान्यता प्राप्त फैक्ट्री नही है सभी फैक्ट्रियां सभी मानकों, एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार के नियमों को ताक पर रखकर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दिन रात खुले में प्रदूषण-जहर फैला रही हैं आरडब्ल्यूए व स्थानीय लोगों ने सैकड़ो बार शिकायतें की हैं लेकिन सभी शिकायतें एक मोटी उगाईयों के रूप में बनकर खत्म हो गई। पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाई गई भूरेलाल कमेटी ने मंडोली औद्योगिक क्षेत्र मैं ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी और फैक्ट्री में अंडरग्राउंड तेल पाइप लाइनों को भी बंद कराया था और नीचे दबे टैंकों को भी निकलवा दिया गया था।
भट्टियां काले तेल से भी चलाई जाती हैं। भट्टी मालिकों को मानकों द्वारा इन संचालित करने को कहा था जिसमें पीएनजी गैस कनेक्शन पर यह फैक्ट्रियां चलानी थी और एयर पयूरीफिकेशन के प्लांट इनको चलाने थे लगभग सात आठ महीने तक यह सिलसिला बहुत ही अच्छे तरीके से चला भी और जैसे ही कमेटी ने अपनी संपूर्ण रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में सब्मिट की उसके बाद स्थानीय जिला शासन प्रशासन के लोगों के साथ मिलकर इन फैक्ट्री मालिकों ने पुयूरीफिकेशन प्लांट चलाना बंद कर दिया था।
भट्टी मलिक फिर से हवा में प्रदूषण-जहर फैला रहे हैं शिकायत करने पर शासन प्रशासन कुछ छोटी फैक्ट्रीयों सील कर भी जाते हैं। लेकिन बड़ी फैक्ट्रियों पर कोई उचित एंव ठोस कार्यवाही नहीं होती है। हर तीसरे घर में रेजिडेंटस सांस की बिमारियों की चपेट में हैँ। पिछले 10 -15 सालों से रेजिडेंटस अस्थमा, दमा, टीबी जैसी खतरनाक बिमारियां होने से अब स्थानीय रेजिडेंटस क्षेत्र से पलायन करने को मजबूर हैं।



