Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में जहरीली हुई हवा, CAQM ने लागू किया GRAP-3, निर्माण कार्यों और पुराने वाहनों पर लगे प्रतिबंध
दिल्ली-NCR में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दीपावली के त्योहार से ठीक पहले राजधानी और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 6 नवंबर 2026 को दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण यानी GRAP-3 को लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी और कई तरह की पाबंदियां लागू होंगी। इनमें गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक, पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए अतिरिक्त निगरानी जैसे कदम शामिल हैं।
दिल्ली-NCR में पिछले कुछ दिनों से हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। प्रदूषण बढ़ने का सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को जहरीली हवा के कारण अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए CAQM की GRAP उप-समिति ने एहतियाती कदम उठाते हुए तीसरे चरण की पाबंदियां लागू करने का निर्णय लिया। आयोग का उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करना और वायु गुणवत्ता को और अधिक बिगड़ने से रोकना है।
GRAP-3 लागू होने के बाद दिल्ली-NCR में गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कार्यों पर रोक लगा दी गई है। इसमें मिट्टी की खुदाई, पाइलिंग, ट्रेंचिंग, सड़क निर्माण और धूल उड़ाने वाली अन्य गतिविधियां शामिल हैं। रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट के संचालन पर भी प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े कुछ कार्यों को निर्धारित नियमों के तहत छूट दी जा सकती है। निर्माण सामग्री जैसे रेत और सीमेंट के परिवहन पर भी सख्ती की जाएगी। इसके अलावा स्टोन क्रशर, खनन गतिविधियों और स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल नहीं करने वाले हॉट मिक्स प्लांट को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाए गए हैं। GRAP-3 के तहत दिल्ली में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल श्रेणी के चारपहिया हल्के मोटर वाहनों के संचालन पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध निर्धारित नियमों के अनुसार दिल्ली और संबंधित NCR जिलों में लागू होगा। इसके साथ ही दिल्ली में प्रवेश करने वाली कुछ श्रेणियों की डीजल मालवाहक गाड़ियों और अंतरराज्यीय डीजल बसों पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। आवश्यक सेवाओं और आपातकालीन कार्यों से जुड़े वाहनों को निर्धारित नियमों के तहत छूट मिल सकती है। वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी गाड़ी की उत्सर्जन श्रेणी और लागू प्रतिबंधों की जानकारी लेकर ही सड़क पर निकलें।
प्रदूषण के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को देखते हुए स्कूलों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। GRAP-3 के तहत स्थानीय प्रशासन को पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प लागू करने का प्रावधान दिया गया है। वहीं, निजी कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड व्यवस्था लागू करें, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। इसके अलावा डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है, हालांकि आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं के लिए निर्धारित छूट लागू रहेगी।
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। पंजाबी बाग में AQI 446 दर्ज किया गया, जबकि नरेला में 434, रोहिणी में 431, आरके पुरम में 416 और बवाना में 412 तक पहुंच गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में 408 और पटपड़गंज में 405 AQI दर्ज किया गया। वहीं, ओखला फेज-2 और इंडिया गेट में 399, ITO में 397, द्वारका सेक्टर-8 में 396, चांदनी चौक में 356 और वसुंधरा एन्क्लेव में 330 AQI रहा। आनंद विहार में यह आंकड़ा 293 और लोधी रोड पर 268 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी तक पहुंच चुकी है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में भी उठा। सुनवाई के दौरान अदालत ने वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन को वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बताया और राजधानी की सड़कों पर भारी ट्रैफिक तथा बार-बार लगने वाले जाम पर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए व्यापक जागरूकता और प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है।
इस बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र का वायु गुणवत्ता पैनल मौसम से जुड़ी परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रहा है। इसमें हवा की दिशा, गति और बहाव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की बात कही। पराली जलाने के मुद्दे पर उन्होंने दावा किया कि इस साल पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पराली प्रबंधन के प्रयास किए गए हैं और धान की लगभग 40 प्रतिशत पराली का इस्तेमाल एक्स-सीटू प्रबंधन के माध्यम से किया गया है।
प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्लीवासियों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता रखने की जरूरत है। लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने, बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करने और प्रदूषण के अधिक स्तर वाले इलाकों में लंबे समय तक रहने से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मौसम तथा वायु गुणवत्ता के आंकड़ों की लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर आगे और सख्त कदम उठाए जा सकें।
दीपावली से ठीक पहले GRAP-3 लागू होने से दिल्ली-NCR में निर्माण गतिविधियों, वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की संभावना है। अब सभी संबंधित विभागों के सामने इन प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू कराने की चुनौती है। CAQM ने एहतियाती कदम के तौर पर यह फैसला लिया है, ताकि आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता और अधिक खराब न हो। दिल्लीवासियों को भी प्रशासन का सहयोग करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है।





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