Home आमने सामने आस्था के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर है दिल्ली सरकार...

आस्था के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर है दिल्ली सरकार का : प्रवेश शर्मा

0
119
प्रवेश शर्मा

आस्था के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर है दिल्ली सरकार का : प्रवेश शर्मा

नई दिल्ली (रविंद्र कुमार): दिल्ली सरकार द्वारा धार्मिक आस्था को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए शुरू की गई पहल के तहत राजधानी में पुरानी एवं खंडित मूर्तियों तथा पूजा सामग्री के सम्मानजनक निस्तारण के लिए 110 विशेष संग्रह केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए दिल्ली के 13 राजस्व जिलों में 81 कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं। सरकार की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे गणेश प्रतिमाओं अथवा अन्य धार्मिक सामग्री का विसर्जन यमुना या किसी अन्य प्राकृतिक जलस्रोत में न करें और निर्धारित कृत्रिम विसर्जन स्थलों का ही उपयोग करें। सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए निगम स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता प्रवेश शर्मा ने कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुरानी, क्षतिग्रस्त अथवा खंडित मूर्तियों के निस्तारण को लेकर लंबे समय से श्रद्धालुओं के सामने उचित व्यवस्था का अभाव रहा है। कई बार लोग धार्मिक भावनाओं के कारण ऐसी मूर्तियों को इधर-उधर रखने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में निर्धारित संग्रह केंद्र उपलब्ध होने से लोगों को धार्मिक सामग्री को सम्मान पूर्वक जमा करने की सुविधा मिलेगी और सार्वजनिक स्थानों पर भी अनावश्यक रूप से पूजा सामग्री पड़े रहने की समस्या कम होगी। प्रवेश शर्मा ने कहा कि गणेश विसर्जन के लिए दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम तालाब तैयार किए जाने से यमुना सहित अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद जल प्रदूषण की समस्या को रोकना भी आज की बड़ी आवश्यकता है। सरकार की ओर से विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा, प्रकाश, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधा, आपातकालीन व्यवस्था और यातायात प्रबंधन जैसे इंतजाम किए जाने की जानकारी दी गई है, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने के साथ ही विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराया जा सके। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की आवश्यकता है। यदि श्रद्धालु अपनी आस्था का पालन करते हुए पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों और पूजा सामग्री का इस्तेमाल करें तथा विसर्जन के लिए निर्धारित स्थानों का ही उपयोग करें तो दिल्ली को स्वच्छ रखने में काफी मदद मिल सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पुरानी एवं खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री को खुले स्थानों, सड़कों अथवा जल स्रोतों के किनारे न छोड़ें, बल्कि सरकार द्वारा बनाए गए संग्रह केंद्रों तक पहुंचाएं। प्रवेश शर्मा ने कहा कि किसी भी सरकारी व्यवस्था की सफलता केवल प्रशासनिक तैयारियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसमें जनता की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने दिल्लीवासियों से अपील की कि धार्मिक आयोजनों के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखें तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए जागरूक करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि श्रद्धालुओं के सहयोग से गणेश विसर्जन और धार्मिक सामग्री के निस्तारण की यह व्यवस्था आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायक साबित होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here