वरिष्ठ कांग्रेस नेता तारिक अनवर से भेंट की दीपक शर्मा ने
राजनीति में आने से पहले पत्रकार थे तारिक
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : केंद्रीय इस्पात एवं संचार मंत्रालय भारत सरकार के पूर्व सदस्य दीपक शर्मा ने कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद लोकसभा तारिक अनवर से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात कर कई विषयों पर चर्चा करी व बदलती देश कि राजनीति पर भी बात हुई तारिक अनवर साहब बहुत ही सरल स्वभाव के ऐसे नेता हैं जिनसे जितनी बार भी मुलाकात होती है एक नई ऊर्जा मिलती है और ऐसा लगता है कि देश में अगर ऐसे नेता हों तो देश प्रगति की ओर बढ़ेगा तारिक अनवर जी भारतीय युवक कॉंग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहें हैं और उन्होंने उस समय युवक कॉंग्रेस को एक नई पहचान देने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी।
दीपक शर्मा कहते हैं तारिक अनवर ने राजनीति में पूर्ण रूप से आने से पहले कुछ समय तक पटना में ही पत्रकारिता की। उन्होंने 1972 में पटना से ‘छात्र’ नामक हिन्दी में एक साप्ताहिक टैब्लॉयड शुरू किया। 1974 में वे ‘युवक धारा’ व साप्ताहिक टैब्लॉयड पत्रिका ‘पटना’ के संपादक बने। बाद में यह पत्रिका 1982 में दिल्ली से ‘फोर्टनाइटली’ पत्रिका के रूप में छपने लगी। तारिक ने राजनीति की पूर्ण शिक्षा सीताराम केसरी से प्राप्त की और अपने पूर्ण राजनीतिक करियर की शुरुआत 1977 के लोकसभा चुनाव से की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर कटिहार से चुनाव लड़ा, किंतु वे हार गए। इसके बाद 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की।
आपातकाल के बाद जनता पार्टी के शासन के दौरान 1977-80 तक वे बिहार राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। 1980 में कांग्रेस के सत्ता में वापस आने पर इंदिरा गांधी ने उन्हें अखिल भारतीय युवक कांग्रेस का महासचिव और बाद में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का संयुक्त सचिव बनाया। इसके बाद तारिक को अखिल भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया और इस पर वे इस पद पर 3 साल से अधिक समय तक रहे। इंदिरा गांधी की हत्या के समय तारिक अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उस समय सिख विरोधी दंगों के दौरान युवक कांग्रेस ने उनके नेतृत्व में राहत एवं पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तारिक, राजीव गांधी के काफी करीबी थे।
राजीव ने पहले उन्हें कांग्रेस सेवा दल का अध्यक्ष और फिर बिहार प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाया। बिहार में सत्येंद्र नारायण सिन्हा के मुख्यमंत्रित्व काल में तारिक को 1988 और 1989 में दो बार कैबिनेट मंत्री बनाने की पेशकश की गई, लेकिन तारिक ने दोनों बार संगठन के कार्यों को तवज्जो दी और मंत्री पद अस्वीकार कर दिया। 1986 में वे ‘तानजीन टाइम्स’ मंथली पत्रिका के संपादक बने, जो दिल्ली से छपती थी।



