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Judo Golden Day: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने 30 मिनट के भीतर जीते गोल्ड

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Judo Golden Day: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने 30 मिनट के भीतर जीते गोल्ड

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो के लिए 31 जुलाई का दिन ऐतिहासिक बन गया। भारत की 23 वर्षीय अस्मिता डे और 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग के फाइनल मुकाबले जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किए। दोनों खिलाड़ियों की जीत के बीच महज 30 मिनट का अंतर रहा। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारतीय जूडो ने कॉमनवेल्थ गेम्स में एक नया इतिहास रच दिया।

सबसे पहले अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेडी क्वाच को गोल्डन स्कोर मुकाबले में हराकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। उनकी यह जीत इसलिए भी बेहद खास रही क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो को पदक स्पर्धा के तौर पर शामिल किए जाने के 36 साल बाद किसी भारतीय महिला खिलाड़ी ने इस खेल में गोल्ड मेडल जीतने का कारनामा किया।

1990 के ऑकलैंड कॉमनवेल्थ गेम्स से जूडो में भारतीय खिलाड़ियों का पदक जीतने का सिलसिला तो रहा, लेकिन स्वर्ण पदक का इंतजार लगातार बना हुआ था। अस्मिता डे ने इस लंबे इंतजार को खत्म करते हुए भारतीय जूडो के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

फाइनल मुकाबले की शुरुआत अस्मिता के लिए आसान नहीं रही। कनाडा की हेडी क्वाच ने शुरुआती दौर में बढ़त बनाई। अस्मिता को पहले युको गंवाना पड़ा और इसके बाद उन्हें एक पेनल्टी भी मिली। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ी ने धैर्य नहीं खोया और मुकाबले में शानदार वापसी की। दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर के बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर तक पहुंचा, जहां अस्मिता ने निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के करीब 30 मिनट बाद भारत के हर्ष सिंह ने भी जूडो में नया इतिहास रच दिया। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में हर्ष ने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जूडो खिलाड़ी जोशुआ कैट्ज को शिकस्त देकर स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए।

हर्ष का यह पहला कॉमनवेल्थ गेम्स अभियान था और उन्होंने फाइनल में बेहद संयमित तथा रणनीतिक प्रदर्शन किया। जोशुआ कैट्ज को मुकाबले से पहले स्वर्ण पदक का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबे समय तक मुकाबला बेहद करीबी रहा और किसी को स्पष्ट बढ़त नहीं मिल सकी।

मुकाबले में निर्णायक क्षण उस समय आया, जब केवल 41 सेकंड का समय बाकी था। हर्ष सिंह ने वाजा-आरी हासिल कर निर्णायक बढ़त बना ली। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और बढ़त को मुकाबले के अंत तक कायम रखते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत लिया।

भारत की तीसरी फाइनलिस्ट यामिनी मौर्य ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई है। फाइनल में पहुंचने के साथ ही उनका कम से कम रजत पदक सुनिश्चित हो चुका है। अब भारतीय प्रशंसकों की नजर उनके फाइनल मुकाबले पर है, जहां वह देश के खाते में एक और स्वर्ण पदक जोड़ने के इरादे से उतरेंगी।

अस्मिता डे की सफलता की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता साइकिल मैकेनिक थे। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने जूडो को अपने करियर के रूप में चुना और लगातार मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

अस्मिता ने अपने खेल सफर की शुरुआत 800 मीटर दौड़ से की थी। बाद में उनके पहले कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो को अपनाया। वर्ष 2015 में वह त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल से जुड़ीं। राष्ट्रीय स्कूल खेलों और खेलो इंडिया में अच्छे प्रदर्शन के बाद वर्ष 2018 में उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण के भोपाल स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण का अवसर मिला।

इसके बाद एशियन ओपन, जूनियर एशिया कप और कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अस्मिता ने अपनी प्रतिभा साबित की। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हासिल कर ली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अस्मिता डे और हर्ष सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि पर दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी। देशभर से दोनों जूडो खिलाड़ियों के लिए शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है।

भारत के लिए एक ही दिन जूडो में दो स्वर्ण पदक जीतना बेहद बड़ी उपलब्धि है। अस्मिता डे ने जहां भारतीय महिला जूडो को कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला स्वर्ण दिलाया, वहीं हर्ष सिंह पुरुष वर्ग में यह कारनामा करने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने। दोनों की ऐतिहासिक जीत ने भारतीय जूडो को नई पहचान दी है और अब यामिनी मौर्य के फाइनल मुकाबले से एक और पदक की उम्मीद बढ़ गई है।

 

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