CNG Price Hike: चुनाव खत्म होते ही भाजपा ने खोला महंगाई का पिटारा: भीष्म शर्मा
जनता के सामने एक कठिन आर्थिक दौर खड़ा कर दिया
– रविंद्र कुमार –
नई दिल्ली , पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी के साथ-साथ दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के महंगे होने से जहां आम जनमानस का परेशान होना लाजमी है वहीं सियासी माहौल भी गर्म हो गया है। राजधानी के विभिन्न इलाकों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महंगाई के मुद्दे को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ दूध के दामों में उछाल को लेकर जनता में नाराजगी साफ देखने को मिल रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महंगाई की यह दोहरी मार सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और रसोई दोनों को प्रभावित कर रही है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक भीष्म शर्मा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव के दौरान किए गए वादों पर सरकार पूरी तरह खामोश है, कई राज्यों में चुनाव समाप्त होते ही महंगाई का पिटारा खोल दिया गया है। उनके अनुसार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे सब्जी, फल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ते हैं। भीष्म शर्मा ने कहा कि अब दूध जैसे जरूरी खाद्य पदार्थ के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिससे हर घर का बजट बिगड़ रहा है। “यह स्थिति बताती है कि सरकार आम जनता की समस्याओं से पूरी तरह बेखबर है।
महंगाई केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह अब सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है,”उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता के बावजूद देश में ईंधन के दाम बढ़ाना सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए जनता पर बोझ डाल रही है, जबकि राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। मेरा मानना है कि वाहनों के ईंधन महंगे होने से माल भाड़ा बढ़ेगा और इसका असर आने वाले समय में हर वस्तु की कीमत पर दिखाई देगा। ऐसे में महंगाई और अधिक बढ़ने की आशंका है, जबकि इसे कम करने की फिलहाल कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही है।भीष्म शर्मा ने कहा कि मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि देश की जनता के सामने एक कठिन आर्थिक दौर खड़ा कर दिया गया है। “महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन नागरिकों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल रही है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है |



