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अस्पतालों की चद्दरों के रंग बदलने से ही नहीं होगा स्वास्थ्य सिस्टम मजबूत : भीष्म शर्मा

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भीष्म शर्मा
अस्पतालों की चद्दरों के रंग बदलने से ही नहीं होगा स्वास्थ्य सिस्टम मजबूत : भीष्म शर्मा

अस्पतालों की चद्दरों के रंग बदलने से ही नहीं होगा स्वास्थ्य सिस्टम मजबूत : भीष्म शर्मा

लचर सिस्टम भी होगा बदलना ,दवा तक तो मिलती नहीं नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : केंद्र सरकार की पहल पर दिल्ली की सरकार नें भी अपने अस्पतालों में मरीजो के बैड की चद्दरें बदलने के लिए कलर कोड तो जारी कर दिया है लेकिन इससे कुछ नहीं होने वाला सरकार को अस्पतालों का पूरा सिस्टम दुरुस्त करना होगा | यह कहना है दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता घोंडा के पूर्व विधायक भीष्म शर्मा का |

भीष्म शर्मा कहते है केवल चोला बदलने से सिस्टम नहीं बदला करता चद्दर का रंग बदलने से साफ़ सफाई का सिस्टम नहीं बदल सकता आज भी खासतौर से यमुनापार के अस्पतालों में यदि जाकर देखा जाए तो अस्पतालों में गंदगी की भरमार है ,शोचालयों की हालत खस्ता है , बरामदों में जगह-जगह गुटके तथा पान की पीक पड़ी रहती है ऐसा करने वालों को रोकने वाला कोई नहीं होता | अनेक स्थानों पर कबाड़ जमा है जिसके चलते मच्छर पनपते है | भीष्म शर्मा कहते हैं ज्यादातर मरीजों को अस्पतालों से पूरी मात्र में दवाएं नहीं मिलती उन्हें पर्ची लिखकर थमा दी जाती है और गरीब लोग बाज़ार से दवा खरीदतें है |

ज्यादातर अस्पतालों में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है ,छोटी मोटी जांच के लिए भी लंबी-लंबी डेट दी जाती है मजबूरीवश लोगो को बाज़ार से जांच करानी पडती है ,अधिकांश अस्पतालों के ब्लड बैंकों से जरूरत पड़ने पर खून तक नहीं मिलता मरीजों के तीमारदारों को महंगी कीमत देकर खून खरीदना पड़ता है | भीष्म शर्मा कहते हैं अनेक अस्पतालों में डाक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है |

आखिर ट्रिपल इंजन सरकार कर क्या रही है ,सरकार अभी चद्दरों के रंग बदलकर कर ही अपनी पीठ थपथपा रही है | सरकार को डाक्टरों की कमी दूर करनी चाहिए ,मरीजो के लिए दवाओं का इंजम कराना चाहिए सभी जांच अस्पतालों के भीतर ही होनी चाहिए | भीष्म शर्मा कहते है बड़े जोर शोर से जिन आयुष्मान मन्दिरों को शुरू किया गया था उनका सिस्टम भी लचर है वहां भी ईलाज की पूरी सुविधा लोगो को नहीं मिल पा रही है | अस्पतालों खासतौर से गुरु तेग बहादुर,स्वामी दयानन्द अस्पताल में बैड की भारी कमी रहती है एक-एक बैड पर दो -दो मरीजों को लेटना पड़ता है ,अस्पतालों में तीमारदारों के लिए अच्छे स्तर के प्रतीक्षा केंद्र बनाये जाने चाहिए केवल बयानबाजी और हवाबाजी से स्वास्थ्य सिस्टम नहीं सुधरने वाला |

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