देश के नवनियुक्त सीडीएस जनरल अनिल चौहान आज पदभार संभाल लिया। इससे पहले वे दिल्ली स्थित वॉर मेमोरियल और अमर जवान जोत पहुंचे और शहीदों को नमन किया। वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि के लिए चौहान के साथ उनके पिता सुरेंद्र सिंह चौहान भी पहुंचे। ले. जन. चौहान को दो दिन पूर्व ही नया सीडीएस बनाया गया है। उन्हें जनरल बिपिन रावत के एक हेलिकाप्टर हादसे में निधन के करीब नौ माह बाद नया सीडीएस नियुक्त किया गया।पदभार ग्रहण करने के मौके पर सीडीएस जनरल चौहान ने कहा, ‘भारतीय सशस्त्र बलों में सर्वोच्च रैंक की जिम्मेदारी संभालने पर गर्व है। मैं चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में तीनों सेना की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करूंगा। हम सभी चुनौतियों और मुश्किलों का मिलकर सामना करेंगे।’नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बतौर अनिल चौहान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल पर ध्यान केंद्रित करेंगे। 61 वर्षीय चौहान सैन्य मामलों के विभाग में सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। केंद्र सरकार ने बुधवार को उन्हें नया सीडीएस मनोनीत किया था। वे 11 वीं गोरखा राइफल्स से हैं। पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत भी इसी रेजिमेंट के थे। नए सीडीएस के तौर पर जनरल चौहान के सामने कई नई चुनौतियां हैं और देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के कई अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करना है। सीडीएस के तौर पर पहली और सबसे बड़ी चुनौती है चीन। जनरल अनिल चौहान के सामने एलएसी पर चीन से चल रही तनातनी एक बड़ी चुनौती है। पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर चीन से डिसइंगेजमेंट तो हो गया है लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है। ऐसे में एलएसी के कमांडर रहने का एक लंबा अनुभव जनरल चौहान के काफी काम आएगा। सेना के अपने 40 साल की सेवाओं के दौरान वे नागालैंड के दीमापुर में 3 कोर के कमांडर के तौर पर अरूणाचल प्रदेश से सटी एलएसी को काफी करीब से देख चुके हैं। इसके बाद डीजीएमओ यानि डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स के तौर पर वे चीन और पाकिस्तान से जुड़े ऑपरेशन्स की कमान संभाल चुके हैं। डीजीएमओ के तौर पर अप्रैल 2018 में जनरल चौहान तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ चीन की आधिकारिक यात्रा पर भी गए थे। एक साल सेना मुख्यालय में डीजीएमओ के पद पर रहने के बाद अनिल चौहान कोलकता स्थित सेना की पूर्वी कमान के कमांडर बनाए गए थे। पूर्वी कमान के कमांडर के तौर पर वे सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश से सटी एलएसी पर चीन की हरकतों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। जिस वक्त पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर चीन से विवाद चल रहा था तब वे सिक्किम और अरूणाचलल प्रदेश से सटी एलएसी पर चीन को काबू करने में जुटे थे। सेना के तीनों अंगों यानि थलसेना, वायुसेना और नौसेना के एकीकरण और थियेटर कमांड बनाना भी उनके सामने एक बड़ी चुनौती है।



