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अपनी विफलताओं पर सदन में चर्चा नहीं करने देती भाजपा सरकार : सुभाष चंद लाला

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सुभाष चंद लाला
अपनी विफलताओं पर सदन में चर्चा नहीं करने देती भाजपा सरकार : सुभाष चंद लाला

अपनी विफलताओं पर सदन में चर्चा नहीं करने देती भाजपा सरकार : सुभाष चंद लाला

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : भारतीय जनता पार्टी ने देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बना रखे है आलम यह है की कोई सरकार की विफलताओं की पोल खोलता है तो उस पर मुकदमे तक दर्ज किये जा रहे हैं कोई प्रदर्शन करता है तो उस पर भी रिपोर्ट दर्ज करायी जा रही है यहाँ तक की विपक्ष के सांसदों को संसद में तो विधायकों को विधानसभा में चर्चा तक नहीं करने दी जाती |

यह कहना है आम आदमी पार्टी विश्वास नगर वार्ड के अध्यक्ष सुभाष चंद लाला का | सुभाष चंद लाला कहते हैं पिछले तीन महीने से दिल्ली की जनता जहरीली हवा के बीच सांस ले रही है पीड़ित लोग बड़ी तादाद में अस्पतालों में ईलाज करा रहे है लेकिन ना तो केंद्र सरकार को उनकी चिंता है और ना ही राज्य सरकार को | सुभाष चंद लाला कहते हैं कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने संसद में विपक्ष को प्रदूषण पर विस्तृत चर्चा नही करने दी और इसी प्रकार दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी प्रदूषण के मुद्दे से पल्ला झाड़ते हुए प्रदूषण पर सर्वदलीय बैठक भी नही बुलाई, और ना ही विपक्ष को इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने दी | केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली में भी भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार भी खतरनाक प्रदूषण की समस्या का व्यवहारिक और स्थायी समाधान निकालने में अभी तक विफल रही है।

हाल ही में संपन्न संसद के शीतकालीन सत्र में सम्पूर्ण विपक्ष की मांग के बावजूद भाजपा सरकार ने प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करने से इंकार कर दिया। खतरनाक प्रदूषण से परेशान दिल्ली के लोग सांसों के संकट से जूझ रहे है। सुभाष लाला कहते हैं विश्लेषण डेटा से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। शीतकाल के दौरान दिल्ली में स्थानीय पीएम 2.5 प्रदूषण का 51 से 53 प्रतिशत हिस्सा वाहनों से आता है।

साथ ही, स्थानीय स्तर पर उत्पन्न प्रदूषण का अनुपात वर्ष 2024 में 27.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में लगभग 35 प्रतिशत हो गया है, जबकि आसपास के एनसीआर जिलों से आने वाले प्रदूषण का योगदान 2023 के 36 प्रतिशत से घटकर 2025 में 25.8 प्रतिशत रह गया है। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि दिल्ली का वायु प्रदूषण अब मुख्य रूप से स्थानीय और परिवहन-जनित है। यह जानने के बाद भी ट्रिपल इंजन सरकार इस और लगातर ढील ही बरतती दिख रही है और मौसम बदलने के बावजूद लोग प्रदूष्ण की मार झेल रहे हैं |

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