2002 के गुजरात दंगों में सामूहिक बलात्कार और परिवार की हत्या के दोषी 11 लोगों की रिहाई के खिलाफ बिलकिस बानो ने सर्वोेच्च अदालत में चुनौती दी है।बिलकिस बानो की दो याचिकाओं में पहली याचिका में 11 दोषियों की रिहाई को चैलेंज किया गया है। जबकि दूसरी याचिका सुप्रीम कोर्ट के मई के आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की गई है। बिलकिस ने सभी को फिर से जेल भेजने की मांग की है। बिलकिस की ओर से कहा गया है कि इस मामले में रिहाई की नीति गुजरात की नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की लागू होनी चाहिए, क्योंकि महाराष्ट्र में ही यह मामला सुना गया और सजा भी यहीं सुनाई गई थी। वहीं, बिलकिस बानों ने सभी दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है।
सीजेआइ चंद्रचूड़ इस मामले पर विचार करेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्तूबर को कहा था कि सजा में छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुजरात सरकार का जवाब बहुत भारी है। इसमें कई फैसलों का हवाला दिया गया है, लेकिन तथ्यात्मक बयान गायब हैं। इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को गुजरात सरकार के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए 29 नवंबर को मामले की आगे सुनवाई तय की। बिलकिस बानो के वकील ने लिस्टिंग के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। सीजेआइ चंद्रचूड़ ने कहा कि वह इस मुद्दे की जांच करेंगे कि क्या दोनों याचिकाओं को एक साथ सुना जा सकता है और क्या उन्हें एक ही बेंच के सामने सुना जा सकता है। इससे पहले, गुजरात सरकार ने अपने हलफनामे में दोषियों को दी गई छूट का बचाव करते हुए कहा था कि उन्होंने जेल में 14 साल की सजा पूरी कर ली है और उनका व्यवहार अच्छा पाया गया है।
मामला 2002 में हुए गुजरात दंगों से जुड़ा है
आपको बता दें, यह मामला गोधरा कांड के बाद 2002 में हुए गुजरात दंगों से जुड़ा है। तब बिलकिस बानो 21 साल की थी और पांच माह की गर्भवती थीं। दंगों के बीच भागते समय बिलकिस के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था और उसके परिवार के सात सदस्य की हत्या कर दी गई थी। मृतकों में उसकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।



