Badaun Flood: बदायूं में गंगा-रामगंगा का कहर, कई गांव पानी से घिरे; हजारों बीघा फसल डूबी, घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में गंगा और रामगंगा नदियों के बढ़े जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कादरचौक, कछला और रामगंगा से सटे कई गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। कहीं घरों के अंदर पानी घुस गया है तो कहीं संपर्क मार्ग और पुलिया डूबने के कारण लोगों का आवागमन बाधित हो गया है। हजारों बीघा कृषि भूमि जलमग्न होने से किसानों को बाजरा, धान, शकरकंद और तिल समेत कई फसलों के खराब होने की चिंता सता रही है।
कादरचौक क्षेत्र के पचौरी नगला गांव में गंगा का पानी पहुंचने के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गांव के करीब 20 घरों में पानी भर गया है। इससे यहां रहने वाले परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
हालात ऐसे हैं कि कुछ ग्रामीण अपने पशुओं के साथ पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। वहीं कई परिवारों ने अपने घर खाली कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर बने मकानों में शरण ली है। ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था की गई है।
गंगा के बढ़े जलस्तर का सबसे बड़ा असर खेती पर दिखाई दे रहा है। पचौरी नगला से लसी नगला तक सड़क के दक्षिणी हिस्से में हजारों बीघा कृषि भूमि पानी में डूब गई है। लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
गन्ने की फसल को छोड़कर बाजरा, शकरकंद, धान और तिल की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। पानी जल्दी नहीं उतरा तो किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
गानइयाई, पांडे नगला, लसी नगला, गढ़िया गंगवार और तेलिया नगला समेत कई गांवों के खेतों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
उझानी ब्लॉक के सरौता और ननाखेड़ा क्षेत्र में भी गंगा का असर दिखाई दे रहा है। कछला-भदरौल रोड पर पानी ओवरफ्लो होकर ननाखेड़ा, मुस्करा, भूढ़ा और भदरौल तक पहुंच गया है।
क्षेत्र में लंबे समय से सूखी पड़ी भैंसोर नदी में भी पानी का प्रवाह शुरू हो गया है। गंगा का पानी आसपास के निचले क्षेत्रों में फैलने के कारण नदी में फिर से पानी दिखाई देने लगा है।
हालांकि शुक्रवार सुबह से गंगा के जलस्तर में कुछ कमी आने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बावजूद कई गांवों और खेतों में पहले से भरा पानी ग्रामीणों के लिए परेशानी बना हुआ है।
खंड विकास अधिकारी सर्वज्ञ अग्रवाल ने प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। पचौरी नगला के आगे लोगों को खेतों तक पहुंचाने के लिए एक नाव भी लगाई गई है।
दूसरी तरफ रामगंगा नदी से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। नदी का जलस्तर स्थिर होने के बावजूद कई गांव अभी पानी से घिरे हैं। पानी नहीं उतरने के कारण संपर्क मार्गों पर सामान्य आवागमन शुरू नहीं हो सका है।
गढ़िया रंगीन की ओर जाने वाले हजरतपुर और नगरिया खनू के मार्गों पर वाहनों का आवागमन प्रभावित है। कई जगह रास्तों और पुलियों के ऊपर पानी होने के कारण लोगों को नाव और मोटर बोट का सहारा लेना पड़ रहा है।
देवरनिया, सकतपुर, कटकौरा, देवचरी, जरतौली और मौसमपुर सिमरिया समेत एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरे बताए जा रहे हैं। सकतपुर गांव में पानी घरों तक पहुंच गया है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
कुंडरा मजरा क्षेत्र में भी बाढ़ का असर संपर्क मार्गों पर पड़ा है। बिहारीपुर से आनंदापुर के बीच बनी पुलिया पानी में डूबी हुई है। वहीं कुंडरा मजरा से कटकौरा मार्ग की पुलिया और शेरपुर के पास संपर्क मार्ग भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है।
कुछ स्थानों पर पक्की सड़क का हिस्सा भी पानी के तेज बहाव से क्षतिग्रस्त हुआ है। ऐसे रास्तों से आवागमन जोखिम भरा होने के कारण प्रशासन लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है।
लगातार कई दिनों से खेतों में पानी भरे रहने के कारण बाजरा की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचने की बात ग्रामीणों की ओर से कही जा रही है। किसानों को आशंका है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो धान की फसल भी बर्बाद हो सकती है।
कछला क्षेत्र के चौसिंगा गांव में भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। कई घरों के करीब तक पानी पहुंच चुका है। गांव के चारों तरफ पानी फैलने से स्थानीय लोगों को आवागमन और रोजमर्रा के कामों में परेशानी हो रही है।
कछला से नानाखेड़ा जाने वाले मार्ग पर करीब दो फीट तक पानी बहने की स्थिति सामने आई है। ग्रामीणों ने अपने खेतों में पानी पहुंचने से रोकने के लिए कई जगह मिट्टी डालकर अस्थायी बांध बनाने की कोशिश भी की है।
चौसिंगा के लोगों को वर्ष 2013 में आई बाढ़ की याद भी सताने लगी है। उस समय भी इलाके में बड़े स्तर पर पानी फैलने से नुकसान हुआ था। मौजूदा हालात को देखते हुए ग्रामीण स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
सरौता क्षेत्र में धान की फसल पानी में डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में खड़ी फसल पर किसानों की लागत लग चुकी है और अब लंबे समय तक पानी भरा रहने पर उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है।
प्रशासन का कहना है कि रामगंगा का जलस्तर फिलहाल स्थिर है। जिन रास्तों पर पानी भरा हुआ है, वहां लोगों की आवाजाही के लिए नाव और मोटर बोट की व्यवस्था की गई है। कुछ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री का वितरण भी शुरू किया गया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक अधिकारी लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों को जरूरत के अनुसार सहायता देने के साथ संपर्क मार्गों और गांवों में पानी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
गंगा और रामगंगा के पानी ने फिलहाल बदायूं के कई ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन और खेती दोनों को प्रभावित किया है। हजारों बीघा फसल पानी में डूबने से किसानों के सामने आर्थिक नुकसान का खतरा है, जबकि कई गांवों में लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
अब ग्रामीणों की सबसे बड़ी उम्मीद नदियों का जलस्तर कम होने और खेतों तथा आबादी वाले क्षेत्रों से जल्द पानी निकलने पर टिकी है। पानी लंबे समय तक जमा रहा तो खरीफ की कई फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नाव, मोटर बोट और राहत सामग्री के जरिए सहायता पहुंचाने का काम जारी है।



