महिला सुरक्षा के दावों के बीच जमीनी हकीकत पर उठे सवाल : नीलम चौधरी
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार) : दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकारी व्यवस्थाओं तथा जमीनी स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच अंतर का सवाल उठने लगा है। महिला सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं, हेल्पलाइन, बसों में सुरक्षा इंतजाम और सीसीटीवी निगरानी के दावों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समस्त रोहताश नगर आरडब्ल्यूए की संस्थापक अध्यक्ष नीलम चौधरी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में घोषणाएं और व्यवस्थाएं तभी सार्थक मानी जाएंगी, जब महिलाएं घर से बाहर निकलने, सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने और कार्यस्थल तक पहुंचने के दौरान स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। नीलम चौधरी ने कहा कि सरकार की ओर से महिला हेल्पलाइन 181, आपातकालीन नंबर 112, वन स्टॉप सेंटर और कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं का उल्लेख किया जा रहा है, लेकिन इन सुविधाओं की वास्तविक उपयोगिता का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि जरूरतमंद महिलाओं को कितनी जल्दी सहायता मिलती है और शिकायतों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि केवल शिकायत दर्ज करने के माध्यम उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। शिकायतकर्ता को समय पर मदद, उचित मार्गदर्शन और कार्रवाई की जानकारी भी मिलनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि चलती बसों में भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। उनके अनुसार, बसों में मार्शल, जीपीएस, सीसीटीवी और पैनिक अलार्म जैसी सुविधाओं का उल्लेख करने के साथ यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ये व्यवस्थाएं कितनी नियमित रूप से काम करती हैं और आपात स्थिति में सहायता कितनी जल्दी पहुंचती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाओं को लेकर चिंता दूर करने के लिए सरकार को ठोस आंकड़ों, कार्रवाई के विवरण और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा को सार्वजनिक करना चाहिए। नीलम चौधरी ने कहा कि दिल्ली की सड़कों, पार्कों, बाजारों और बस स्टॉप पर सुरक्षा का वातावरण बनाना भी जरूरी है। कई स्थानों पर रोशनी, निगरानी और नियमित पुलिस गश्त की जरूरत का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि महिलाओं की आवाजाही वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान करके वहां सुरक्षा इंतजामों को मजबूत किया जाए और नागरिकों से मिलने वाली शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आंतरिक समितियों, स्थानीय समितियों और शी-बॉक्स जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी कर्मचारियों तक पहुंचनी चाहिए। महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने में किसी तरह का भय या दबाव महसूस नहीं होना चाहिए। साथ ही, शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि महिलाओं का संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके। बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर नीलम चौधरी ने कहा कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे और आत्मरक्षा प्रशिक्षण उपयोगी कदम हो सकते हैं, लेकिन इनके साथ बच्चों के प्रति अपराध रोकने, शिकायत मिलने पर तत्काल हस्तक्षेप करने और जरूरतमंद बच्चों को संरक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल संरक्षण इकाइयों के बारे में अभिभावकों, शिक्षकों और बच्चों को जागरूक किया जाना चाहिए।



