Air Pollution Delhi: करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद प्रदूषण पर काबू पाने में विफल दिल्ली सरकार: एम. एल. भास्कर
नई दिल्ली (स्पर्श भारद्वाज)। दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर रोहिणी जिला कांग्रेस कमेटी के एससी विभाग के चेयरमैन एम. एल. भास्कर ने दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदूषण पर नियंत्रण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने और समय-समय पर बड़े-बड़े दावे किए जाने के बावजूद राजधानी के लोगों को स्वच्छ हवा नहीं मिल पा रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
एम. एल. भास्कर ने कहा कि सर्दियों के दौरान दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब होने से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार को प्रदूषण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केवल अस्थायी उपायों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक ठोस और प्रभावी कार्ययोजना लागू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई देना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
उन्होंने निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों पर जमा धूल, कूड़ा जलाने की घटनाओं और औद्योगिक उत्सर्जन को वायु प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल बताया। भास्कर के मुताबिक, इन स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल, नियमित निगरानी और प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर लगातार निगरानी नहीं रखी जाएगी, तब तक समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित परिणाम हासिल करना मुश्किल होगा।
एम. एल. भास्कर ने प्रदूषण नियंत्रण पर खर्च की गई धनराशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कितनी धनराशि आवंटित की गई और उसमें से कितनी राशि खर्च हुई। इसके साथ ही, इन योजनाओं के परिणामों और वायु गुणवत्ता में हुए सुधार का विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रदूषण कम करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों और उन्हें हासिल करने की समयसीमा की जानकारी देना भी जरूरी है, ताकि योजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा, साफ वातावरण और बेहतर स्वास्थ्य का अधिकार चाहिए। इसके लिए सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करने, सड़कों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने, निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और कूड़ा जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने जैसे कदमों को गंभीरता से लागू करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इन उपायों की नियमित निगरानी होनी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें।
भास्कर ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान किसी एक विभाग या सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए दिल्ली सरकार, नगर निगम, संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और जहां भी लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उनके अनुसार, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण हासिल करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
एम. एल. भास्कर ने अंत में कहा कि दिल्लीवासियों को प्रदूषण मुक्त वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, तो संबंधित योजनाओं की प्रभावशीलता और उनके परिणामों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजधानी के लोगों को अब केवल दावों और घोषणाओं के बजाय ऐसे ठोस बदलावों की जरूरत है, जिनसे वायु गुणवत्ता में सुधार हो और उन्हें स्वच्छ हवा में सांस लेने का अवसर मिल सके।



