प्रशासनिक बदलाव से मिलेगी दिल्ली की जनता को राहत : विनोद जायस
नई प्रणाली इसी माह लागू करने की तैयारी नई दिल्ली ( सी.पी.एन,न्यूज़ ) : दिल्ली सरकार नें राजधानी दिल्ली में लोगो को उनके घरो के निकट एक ही छत के नीचे तमाम सरकारी योजनाओं की सुविधाएँ देने के मकसद से मिनी सचिवालय बनाने का जो निर्णय लिया है उससे दिल्ली की जनता को बड़ी राहत मिलेगी | यह कहना है भारतीय जनता पार्टी उत्तर पूर्वी जिले के उपाध्यक्ष ठाकुर विनोद जायस का |
विनोद जायस कहते हैं दिल्ली के जिलों में बढ़ोतरी के साथ सरकार ने एसडीएम की संख्या 33 से बढ़ाकर 39 कर दी है। पहले जहां 22 एसडीएम कार्यालय थे, अब नई व्यवस्था में ये बढ़कर 39 हो जाएंगे। सभी 13 जिलों में एकीकृत जनसेवा केंद्र के रूप में मिनी सचिवालय स्थापित किए जाएंगे, जहां अलग-अलग विभागों की सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। कैबिनेट के निर्णय पर अगले 15 दिनों में अधिसूचना जारी होगी और नई प्रणाली इसी माह लागू करने की तैयारी है। प्रारंभिक चरण में इसके लिए 25 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया है। विनोद जायस कहते हैं इस बदलाव से नागरिकों का समय बचेगा, प्रशासनिक प्रक्रियाएँ तेज होंगी और जमीन से जुड़े दस्तावेज, पंजीकरण तथा शिकायत निवारण जैसी सेवाएँ और अधिक सुव्यवस्थित होंगी।
इस व्यवस्था के माध्यम से कार्यों में समन्वय बढ़ेगा और अव्यवस्था या जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे जनता की समस्याओं का समय पर निपटारा हो सकेगा। यह कदम सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है | विनोद जायस कहते हैं दिल्ली के प्रशासनिक नक्शे को सुदृढ़ बनाने की यह प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई थी, जिसे किसी भी सरकार ने गंभीरता से हल नहीं किया। ट्रिपल इंजन की सरकार नें ने केवल 10 महीने में इस लक्ष्य को पूरा किया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन मॉडल को जमीनी स्तर पर साकार करने का एक उत्तम उदाहरण है। विनोद जायस कहते हैं नई संरचना के तहत 11 की बजाय 13 जिले और 33 की बजाय 39 सब-डिविजन होंगे।
इससे प्रत्येक अधिकारी पर कार्यभार संतुलित होगा और नागरिकों को सेवाएँ अधिक तेजी से मिल सकेंगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी 13 जिलों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त मल्टी-डिपार्टमेंटल मिनी सचिवालय बनाए जाएँगे, जहाँ राजस्व कार्यालय, एसडीएम, एडीएम, तहसील, उप-पंजीयक कार्यालय और अन्य विभाग एक ही परिसर से संचालित होंगे। इस पुनर्गठन में पुरानी दिल्ली जिला और मध्य उत्तरी जिला दो नए जिले शामिल किए गए हैं।
विनोद जायस कहते हैं भूमि और संपत्ति से जुड़े कामों को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की संख्या 22 से बढ़कर 39 कर दी गई है। सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की सीमाओं को अब संबंधित सब-डिविजन से जोड़ा जाएगा। इससे न केवल भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण में तेजी आएगी, बल्कि लोगों को दूर-दराज के इलाकों में जाकर दस्तावेज़ पंजीकरण कराने की परेशानी भी नहीं होगी। विनोद जायस कहते हैं जिलो के गठन और मिनी सचिवालय की कैबिनेट मंजूरी के बाद डीएम के अधिकार भी बढ़ेंगे। सभी विभागों के अधिकारी जब डीएम कार्यालय में बैठेंगे, तो विभिन्न शिकायतों पर जवाब तलब करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का अधिकार डीएम के पास होगा। सभी विभागों का एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा, जो डीएम के प्रति जवाबदेह रहेगा।



