Maharashtra ATS: हडपसर बम मामले में नागपुर रेलवे स्टेशन से आरोपी गिरफ्तार, पुणे अस्पताल में बड़ी साजिश का खुलासा
महाराष्ट्र में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है जब एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने पुणे के हडपसर बम मामले के मुख्य आरोपी को नागपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब आरोपी ट्रेन पकड़कर फरार होने की कोशिश कर रहा था। आरोपी की पहचान शिवाजी राठौड़ के रूप में हुई है, जो मूल रूप से सोलापुर का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी ने पुणे के हडपसर इलाके स्थित ‘कामधेनु एस्टेट’ के एक प्राइवेट अस्पताल में विस्फोटक उपकरण रखने की साजिश रची थी, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। घटना सामने आने के बाद पुणे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई थीं और आरोपी की तलाश तेज कर दी गई थी। तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट की मदद से ATS को आरोपी की लोकेशन नागपुर रेलवे स्टेशन पर मिली, जहां से उसे हिरासत में ले लिया गया। बताया जा रहा है कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार जगह बदल रहा था और ट्रेन के जरिए दूसरे राज्य भागने की योजना बना रहा था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे दबोच लिया।
पुणे के हडपसर इलाके में यह मामला तब सामने आया जब एक निजी अस्पताल के अंदर शौचालय के पास एक संदिग्ध वस्तु मिली, जिसमें डिजिटल घड़ी जैसा उपकरण लगा हुआ था। अस्पताल के एक डॉक्टर ने सबसे पहले इस संदिग्ध वस्तु को देखा और तुरंत इसकी सूचना पुलिस नियंत्रण कक्ष को दी। सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा और पूरे परिसर को सुरक्षित करते हुए विस्फोटक को पास के खुले मैदान में ले जाकर निष्क्रिय कर दिया गया। इस घटना ने पूरे अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने बाद में पुष्टि की कि विस्फोटक को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया है और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक सुनियोजित साजिश हो सकती है, जिसके पीछे और लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल ATS और पुणे पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी घटना के बाद पुणे से फरार होकर नागपुर पहुंचा था और वहां से आगे भागने की कोशिश कर रहा था। लेकिन खुफिया तंत्र की सतर्कता और तकनीकी निगरानी के कारण उसे समय रहते पकड़ लिया गया। अब जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस साजिश का मकसद क्या था और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।



