Farmer Strike India: 10 किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन, US ट्रेड डील और नए लेबर कोड समेत कई मुद्दों पर विरोध
नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल और ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस बंद को पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) सहित कई विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है। किसान संगठनों और मजदूर यूनियनों ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स), बिजली विधेयक-2025, बीज विधेयक-2025 और VB-G RAM G एक्ट-2025 के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन केवल एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और आम जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है। संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाली हैं, जबकि किसान और श्रमिक वर्ग पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के लाखों मजदूर भाग ले सकते हैं। एसकेएम ने किसानों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरें और औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाएं। कृषि मजदूर यूनियनों का मंच और एनआरईजीए संघर्ष मोर्चा (एनएसएम) ने भी इस बंद को समर्थन देने की घोषणा की है।
किसान संगठनों का प्रमुख विरोध नए लेबर कोड्स के खिलाफ है। उनका कहना है कि चार नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करती हैं और नौकरी की सुरक्षा को कम करती हैं। प्रदर्शनकारी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने और योजना कार्यकर्ताओं को श्रमिक का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।
‘बिजली विधेयक-2025’ और ‘बीज विधेयक-2025’ भी विरोध के केंद्र में हैं। एसकेएम का आरोप है कि नया बिजली कानून किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और स्मार्ट मीटर अनिवार्य करेगा। वहीं, बीज विधेयक को लेकर आशंका जताई गई है कि इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबदबा बढ़ेगा, बीजों की कीमतें अनियंत्रित होंगी और कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। किसान संगठनों ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर योजना वापस ली जाए और सभी उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाए।
VB-G RAM G अधिनियम-2025 को लेकर भी असंतोष है। किसान संगठनों और नरेगा संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर कर सकता है। उनका कहना है कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देता है और इसे समाप्त या कमजोर करना गांवों की आजीविका पर सीधा प्रहार होगा।
भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी विरोध तेज है। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे ‘आर्थिक उपनिवेशवाद’ का खाका बताया है। संगठनों का दावा है कि इस समझौते से भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को नुकसान हो सकता है, क्योंकि सस्ते आयात से घरेलू उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी। कुछ संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाने और मुक्त व्यापार समझौतों की प्रतियां जलाने की अपील भी की है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस बंद को समर्थन देते हुए कहा कि मजदूरों और किसानों की आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े फैसले लेते समय प्रभावित वर्गों से संवाद नहीं कर रही है। आम आदमी पार्टी ने भी घोषणा की है कि उसके कार्यकर्ता किसानों और मजदूरों के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन करेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा ने 2020-21 के किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान 736 किसानों ने अपनी जान गंवाई, लेकिन अब तक कई प्रमुख मांगें पूरी नहीं हुईं। किसानों की प्रमुख मांगों में सभी फसलों पर C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी और पूर्ण कर्जमाफी शामिल है।
देशभर में आयोजित इस ‘भारत बंद’ को किसान-मजदूर एकता का बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन नई आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश का प्रतीक है। वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इस बंद पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


