India-EU FTA: ‘मदर ऑफ ऑल डील’ पर लगी मुहर, 90% से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर घटेंगे टैरिफ, सस्ते होंगे यूरोपीय सामान
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही बातचीत के बाद आखिरकार ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर मुहर लग गई है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान इस बहुप्रतीक्षित समझौते की आधिकारिक घोषणा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन ने हैदराबाद हाउस में मुलाकात कर इस समझौते को अंतिम रूप दिया। इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” नाम दिया गया है, क्योंकि यह भारत के अब तक के सबसे बड़े और व्यापक व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है।
इस FTA के तहत भारत और यूरोपीय संघ के बीच 97 से 99 प्रतिशत सेक्टर को कवर किया गया है और 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर टैरिफ में बड़ी कटौती की जाएगी। सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस समझौते के अगले साल की शुरुआत से लागू होने की संभावना है। समझौते में भारत के संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर की सीमाओं का खास ध्यान रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों और छोटे उत्पादकों के हित सुरक्षित रह सकें।
इस समझौते का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी देखने को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, अभी तक 110 प्रतिशत टैरिफ के चलते 750 एमएल Heineken बीयर की फैक्ट्री कीमत करीब 850 रुपये होने के बावजूद इसकी लैंडेड कॉस्ट लगभग 1,785 रुपये पड़ती थी और रिटेल स्टोर तक पहुंचते-पहुंचते कीमत 3,000 रुपये के आसपास हो जाती थी। FTA के बाद टैरिफ घटकर 50 प्रतिशत होने से इसकी लैंडेड कॉस्ट लगभग 1,275 रुपये रह जाएगी, जिससे बाजार में इसकी कीमत करीब 2,000 रुपये तक आ सकती है।
इसी तरह, 4,000 रुपये से अधिक कीमत में बिकने वाली Absolut वोडका अब 2,500 से 3,000 रुपये के दायरे में मिल सकती है। मध्यम रेंज की फ्रेंच वाइन, जो पहले करीब 2,000 रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत घटकर लगभग 1,200 रुपये हो सकती है। हालांकि, अंतिम खुदरा कीमतें राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स और स्थानीय करों पर भी निर्भर करेंगी।
इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा से घरेलू शेयर बाजार में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। निवेशकों को उम्मीद है कि यूरोपीय बाजारों तक आसान पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों के निर्यात में बड़ा इजाफा होगा। इसी भरोसे के चलते टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनियों जैसे KPR मिल, वेलस्पन लिविंग और नितिन स्पिनर्स के शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। इसके साथ ही फार्मा और केमिकल सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी है।
फिलहाल भारत के कुल निर्यात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय संघ को जाता है। ब्रोकरेज फर्म Emkay Global के अनुसार, यह द्विपक्षीय समझौता मीडियम-टेक मैन्युफैक्चरिंग के जरिए भारत के EU को होने वाले निर्यात में लगभग 50 अरब डॉलर की बढ़ोतरी कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA न सिर्फ व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि भारत-EU संबंधों को भी रणनीतिक रूप से और मजबूत करेगा।



