Iran Protest: ईरान में हिंसक हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन, 35 की मौत, हजारों गिरफ्तार, ट्रंप के दखल की आशंका
ईरान में बढ़ती महंगाई, आर्थिक बदहाली और मुद्रा की गिरती कीमतों के खिलाफ शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। बीते दो हफ्तों से जारी ये विरोध प्रदर्शन अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और पिछले तीन वर्षों में ईरान के सबसे बड़े जनआंदोलन के तौर पर देखे जा रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकार इन्हें काबू में करने में नाकाम होती नजर आ रही है, जबकि हिंसा और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका बेस्ड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरानी सुरक्षाबलों के दो जवान शामिल हैं। इसके अलावा 1,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के 31 में से 27 प्रांतों में 250 से अधिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। सरकारी इमारतों, बैंकों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की भी खबरें सामने आई हैं। झड़पों में करीब 250 पुलिसकर्मी और आईआरजीसी के बसीज बल के 45 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन थमने के आसार नजर नहीं आ रहे।
ईरान में बढ़ती हिंसा के बीच अमेरिका के दखल की आशंका भी तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह दखल किस रूप में होगा।
ट्रंप की धमकी पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा है कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह ईरान का आंतरिक मामला है और किसी भी बाहरी ताकत को इसमें दखल देने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
ईरान में यह विरोध प्रदर्शन देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारण शुरू हुए थे। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और करेंसी में भारी गिरावट से आम लोग परेशान हैं। शुरुआत में व्यापारियों ने इसका नेतृत्व किया, लेकिन धीरे-धीरे इसमें छात्र, मजदूर और आम नागरिक भी शामिल हो गए। कई शहरों में लोग लगातार सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
इस बीच भारत सरकार ने भी हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और विरोध प्रदर्शनों या रैलियों वाले इलाकों से दूर रहें।
ईरान में हालात तेजी से बदल रहे हैं और बढ़ती मौतों के बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ता जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ईरानी सरकार हालात को कैसे संभालती है और क्या अमेरिका वास्तव में इस संकट में कोई सक्रिय भूमिका निभाता है या नहीं।



