गाँधी नगर में सातवाँ मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम आयोजित : बंटी शर्मा
* लवली और रोमेश गुप्ता भी पहुंचे
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : गाँधी नगर विधानसभा के अंतर्गत श्री बरहा नागा साईं मन्दिर ( बड़ी गौशाला ) लोहे वाले पुल के पास इस साल भी माधव पंजीक्रत संस्था के तत्वावधान में मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया | उक्त जानकारी देते हुए संस्था के अध्यक्ष बंटी शर्मा नें बताया उनकी संस्था लगातार पिछले सात साल से यह सेवा कर रही है | उन्होंने बताया इस अवसर पर भगवान श्री सत्यनारायण जी की कथा का भी भव्य आयोजन किया गया | इसके अलावा इस मौके पर श्री गोवर्धन जी महाराज की पूजा भी की गई तथा श्रधालुओं के लिए अन्नकूट के भंडारे का आयोजन भी किया गया | जिसमे सैकडो लोगो नें भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया |

बंटी शर्मा नें बताया उनकी संस्था नें लोगो से आग्रह किया था इस मौके पर भगवान जी ,देवी देवताओं की मूर्तियाँ तथा तस्वीर लेकर लाये इसके अलावा पूजा का सामन जो विसर्जन करने योग्य है लेकर आयें | बंटी शर्मा कहते हैं खंडित मूर्तियाँ तथा भगवान जी के चित्रों को सम्मानपूर्वक विसर्जन अथवा भू समाधि विधि विधान से दी जानी चाहिए | उन्होंने कहा अक्सर देखा जाता है साल भर घरों के मन्दिरों में विराजमान मूर्तियों को लोग इधर -उधर रख देते हैं जो की उचित नहीं है इसलिए हम लोग यह कार्यक्रम आयोजित करते बड़े विधि विधान से करते हैं और लोगो को इस पुन्य के आयोजन में आमंत्रित करते हैं |
बंटी शर्मा नें बताया लोगो में बड़ी तेजी के साथ इस अनुष्ठान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और धीरे-धीरे यह कारवां बढ़ रहा है | उन्होंने बतया कार्यक्रम में क्षेत्रीय लोगो के अलावा स्थानीय विधायक यमुनापार विकास बोर्ड के चेयरमेन अरविन्द्र सिंह लवली ,पूर्व निगम पार्षद भरिय जनता पार्टी शाहदरा जिले के महामंत्री रोमेश चंद गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग तथा संस्था के पदाधिकारी मौजूद रहे तथा धर्मलाभ प्राप्त किया |
इस अवसर पर रोमेश गुप्ता नें कहा मूर्तियों का विसर्जन या भू-समाधि इस बात का प्रतीक है कि भगवान का कोई एक रूप नहीं है। हम उनकी पूजा करने के लिए एक अस्थायी रूप में मूर्ति बनाते हैं। पूजा समाप्त होने के बाद, हम उस रूप को उसी तत्व में विलीन कर देते हैं जिससे वह बनी है, यह दर्शाता है कि भगवान अनंत और निराकार हैं। धार्मिक मान्यता है कि पूजा के दौरान मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, जिससे मूर्ति में दैवीय ऊर्जा का संचार होता है। जब पूजा संपन्न हो जाती है, तो उस मूर्ति को जल में विसर्जित करने से उस ऊर्जा का विलय होता है और वह ऊर्जा वापस ब्रह्मांड में लौट जाती है।
अरविन्द्र सिंह लवली नें कहा विसर्जन और भू-समाधि एक शुद्धि की प्रक्रिया है। जब हम किसी मूर्ति की पूजा करते हैं, तो उस पर हमारा ध्यान, हमारी भावनाएं और हमारी ऊर्जा केंद्रित होती है। विसर्जन के बाद, उस मूर्ति से जुड़ी सभी ऊर्जाएं विलीन हो जाती हैं और वह अपने मूल तत्व में मिल जाती है। यह हमें यह भी सिखाता है कि किसी भी चीज का अंत उसके मूल में ही होता है।



