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Manoj Kumar Jain: मेनका गांधी को भेजा गया आपत्ति-पत्र : मनोज कुमार जैन

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Manoj Kumar Jain: मेनका गांधी को भेजा गया आपत्ति-पत्र : मनोज कुमार जैन

नई दिल्ली (स्पर्श भारद्वाज ) : भगवान महावीर देशना फाउंडेशन के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर दिल्ली के लाल मंदिर परिसर में दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी के संबंध में दिए गए उनके कथनों पर गहरी आपत्ति व्यक्त की है। पत्र में कहा गया है कि उक्त वक्तव्य से देशभर के जैन समाज, दिगंबर जैन संत समुदाय तथा भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी प्राकृतिक रूप से झड़े हुए मोर पंखों से निर्मित होती है और इसका उद्देश्य सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना तथा जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा का पालन करना है। फाउंडेशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि मोरपंख केवल जैन परंपरा ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति में भी अत्यंत पवित्र एवं श्रद्धा का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में सुशोभित मोर पंख भारतीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण अंग है।

ऐसे में बिना पर्याप्त प्रमाण के लगाए गए आरोप समाज में भ्रम उत्पन्न करने के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाते हैं। भगवान महावीर देशना फाउंडेशन ने श्रीमती मेनका गांधी जी के पशु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए योगदान का सम्मान करते हुए उनसे आग्रह किया है कि वे अपने वक्तव्य की पुनः समीक्षा करें तथा यदि कथन तथ्यात्मक रूप से असत्य या भ्रामक पाए जाएं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से वापस लेकर जैन संत समुदाय एवं श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेद व्यक्त करें। फाउंडेशन ने यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में किसी भी धार्मिक परंपरा या आस्था से जुड़े विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पूर्व संबंधित समुदाय के प्रतिनिधियों एवं विषय विशेषज्ञों से संवाद स्थापित किया जाए, जिससे समाज में सौहार्द, आपसी सम्मान एवं विश्वास की भावना और अधिक सुदृढ़ हो सके। भगवान महावीर देशना फाउंडेशन ने आशा व्यक्त की है कि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए सकारात्मक एवं संवेदनशील पहल की जाएगी, जिससे धार्मिक सद्भाव और सामाजिक समरसता को बल मिले।

 

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