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CJI BR Gavai Oath: मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने ली शपथ, मां कमलताई के चरणों में झुके, कहा– मां का आशीर्वाद सबसे बड़ा सम्मान

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CJI BR Gavai Oath: मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने ली शपथ, मां कमलताई के चरणों में झुके, कहा– मां का आशीर्वाद सबसे बड़ा सम्मान

नई दिल्ली: भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में बीआर गवई ने आज राष्ट्रपति भवन में अपने पद की शपथ ली। उन्होंने यह शपथ हिंदी भाषा में ली, जिससे देश की न्याय प्रणाली में भारतीय भाषाओं को सम्मान देने का संदेश भी गया। लेकिन शपथ ग्रहण समारोह में एक भावनात्मक क्षण तब आया जब उन्होंने मंच से उतरकर अपनी मां कमलताई गवई के चरणों में झुककर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य न सिर्फ अद्भुत था, बल्कि यह उस रिश्ते की गहराई को भी दिखाता है जहां मां की ममता और बेटे का सम्मान सर्वोच्च पद पर पहुंचकर भी वैसा ही बना रहता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बीआर गवई को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्होंने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वे पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना से भी मिले और उनका आभार प्रकट किया। लेकिन सबसे भावुक क्षण तब आया जब गवई सीधे अपनी मां के पास पहुंचे और उनके चरणों में झुक गए। कमलताई गवई ने भी बेटे को भरपूर आशीर्वाद दिया और कहा कि उनका बेटा इस पद तक अपनी मेहनत और लगन से पहुंचा है।

कमलताई गवई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह दिन उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि बीआर गवई ने जीवनभर संघर्ष किया, और न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचना उनका सपना नहीं था, बल्कि यह उनकी निष्ठा और मेहनत का फल है। उन्होंने यह भी कहा कि आज हर मां को यह गर्व महसूस होना चाहिए कि उनका बेटा देश में न्याय व्यवस्था की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठा है।

बीआर गवई को 18 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। उन्होंने जस्टिस संजीव खन्ना की सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला है। वे इस पद पर लगभग छह महीने तक रहेंगे और नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त होंगे। उनका जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था और उन्होंने 16 मार्च 1985 को वकालत की शुरुआत की थी।

चीफ जस्टिस बीआर गवई की यह पदग्रहण केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि इसमें पारिवारिक संस्कार, भारतीय परंपराएं और मातृत्व का आदर साफ झलक रहा था। यह क्षण आज लाखों भारतीयों के दिल को छू गया, जहां एक बेटा, मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद भी मां के आशीर्वाद को सबसे बड़ा मान देता है।

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