Chhattisgarh Liquor Scam: शराब घोटाला मामले में ED का बड़ा एक्शन, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया है। ईडी अब उन्हें अदालत में पेश कर उनकी हिरासत की मांग करेगी।
रामगोपाल अग्रवाल को इससे पहले छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कथित शराब घोटाले, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में जुलाई में गिरफ्तार किया था। ईओडब्ल्यू की कार्रवाई के बाद अब ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से अपनी जांच आगे बढ़ाते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है।
ईडी के अनुसार, कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों से जुड़े एक कथित आपराधिक सिंडिकेट ने राज्य के आबकारी विभाग की गतिविधियों पर व्यापक नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
ईडी का दावा है कि इस कथित नेटवर्क के कारण राज्य सरकार को करीब 2,883 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। एजेंसी के मुताबिक, अवैध शराब की बिक्री से कथित तौर पर कमीशन की रकम जुटाई गई और इसे नेटवर्क में शामिल लोगों तक पहुंचाया गया। ईडी का आरोप है कि इस रकम का वितरण कथित तौर पर राज्य के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार किया गया।
इस मामले में ईडी अब तक छह आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और जांच में 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों की सूची में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास, पूर्व संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और मुख्यमंत्री कार्यालय की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं।
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी से पहले भी उनका नाम छत्तीसगढ़ के कथित शराब और अन्य आर्थिक घोटालों की जांच में सामने आता रहा है। ईओडब्ल्यू ने जुलाई के पहले पखवाड़े में उन्हें कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों से जुड़े मामलों की जांच के दौरान गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया था।
अदालत ने उस समय उन्हें 17 जुलाई तक नौ दिनों की कस्टोडियल रिमांड पर ईओडब्ल्यू को सौंपा था। जांच एजेंसी अब कथित तौर पर उनके माध्यम से पैसों के लेनदेन और अलग-अलग मामलों के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।
रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक तौर पर सक्रिय नजर नहीं आए थे। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आती रही थीं। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद कथित आर्थिक मामलों में उनकी भूमिका और पैसों के लेनदेन को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है।
ईओडब्ल्यू का कहना है कि कोल लेवी मामले की जांच के दौरान कथित तौर पर सूर्यकांत तिवारी की जब्त डायरी से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। जांच एजेंसी के मुताबिक, डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की प्रविष्टियां दर्ज थीं। ईओडब्ल्यू का दावा है कि इन पैसों को रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से कांग्रेस भवन तक पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित रकम का वास्तविक स्रोत क्या था, पैसा किन लोगों ने उपलब्ध कराया और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। इसके साथ ही कथित लेनदेन में शामिल अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
शराब घोटाले की जांच में ईडी की कार्रवाई पिछले कई वर्षों से जारी है। एजेंसी ने मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध शराब कारोबार और कमीशन के नेटवर्क को लेकर कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच एजेंसी के दावों के मुताबिक, शराब कारोबार से जुड़ी कथित अवैध कमाई को अलग-अलग माध्यमों से खपाया गया और इससे जुड़े लोगों के बीच रकम का वितरण किया गया।
वहीं कांग्रेस लगातार केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि उसके नेताओं के खिलाफ ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां इन मामलों को वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला बताकर अपनी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताती रही हैं।
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब ईडी उनसे कथित शराब घोटाले और उससे जुड़े मनी ट्रेल को लेकर पूछताछ करेगी। एजेंसी यह भी जांच कर सकती है कि कथित रकम के लेनदेन में उनकी क्या भूमिका थी और अन्य आरोपियों के साथ उनका किस तरह का संपर्क था। आगे की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और पूछताछ से इस मामले में उनकी कथित भूमिका को लेकर और जानकारी सामने आने की संभावना है।



