Factory Fire: रामगढ़ के मां छिन्नमस्तिका इस्पात प्लांट में धमाके के बाद भीषण आग, 3 इंजीनियरों की मौत; एक मजदूर गंभीर
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। पावर प्लांट के कंट्रोल रूम में कथित तौर पर जोरदार धमाके के बाद भीषण आग लग गई। हादसे में बुरी तरह झुलसे तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद प्लांट में अफरा-तफरी मच गई और रात की पाली में काम कर रहे मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
घटना रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड अंतर्गत बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल स्थित स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुई। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार देर रात प्लांट में उत्पादन कार्य चल रहा था। इसी दौरान पावर प्लांट साइट के कंट्रोल रूम में अचानक जोरदार धमाका हुआ और इसके बाद आग तेजी से फैल गई।
धमाके और आग की चपेट में आने से कंट्रोल रूम में मौजूद कर्मचारियों को संभलने का मौका नहीं मिला। तीन इंजीनियर गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन तीनों की मौत हो गई। वहीं एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
मृतकों की पहचान फैक्ट्री के शिफ्ट इंचार्ज 50 वर्षीय संजीव कुमार केसरी, 25 वर्षीय विनीत महतो और 24 वर्षीय अभिषेक पांडेय के रूप में हुई है। संजीव कुमार केसरी रांची के रहने वाले बताए गए हैं, जबकि विनीत महतो बोकारो के जगेश्वर बिहार और अभिषेक पांडेय गढ़वा के रहने वाले थे।
हादसे में घायल मजदूर की पहचान हजारीबाग निवासी तरुण रजवार के रूप में हुई है। आग की चपेट में आने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए रांची रोड स्थित द हॉप हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार चल रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के समय फैक्ट्री में रात की शिफ्ट में उत्पादन का काम चल रहा था। अचानक हुए धमाके की तेज आवाज सुनकर प्लांट में मौजूद मजदूरों में दहशत फैल गई। इसके तुरंत बाद आग दिखाई देने लगी और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे।
आग की सूचना फैक्ट्री प्रबंधन और पुलिस को दी गई। जानकारी मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। आग की भयावहता को देखते हुए रामगढ़ से दमकल की पांच गाड़ियों को बुलाया गया। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
आग बुझने के बाद घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया गया। हादसे में तीन लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद फैक्ट्री कर्मचारियों और मृतकों के परिजनों में शोक का माहौल बन गया। घटना की जानकारी आसपास के गांवों में पहुंचने के बाद शनिवार सुबह से बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण फैक्ट्री गेट के आसपास जुटने लगे।
स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों की ओर से आश्रित परिवारों के लिए मुआवजे और नौकरी की मांग उठाई जा रही है। ग्रामीणों के फैक्ट्री गेट पर जुटने के बाद वहां स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिए जाने की मांग की जा रही है।
इस बीच हादसे के कारणों को लेकर गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। फैक्ट्री के पावर प्लांट यूनिट के इंचार्ज अनुराग त्रिपाठी ने प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कंट्रोल रूम में तापमान को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण ओवरहीटिंग की स्थिति बनी और इसी वजह से हादसा हुआ।
अनुराग त्रिपाठी के मुताबिक, संबंधित स्थान पर तापमान नियंत्रित रखने के लिए एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था करने की मांग कई बार की गई थी। उनका आरोप है कि इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना के बाद औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों की सुरक्षा और पावर प्लांट जैसे संवेदनशील हिस्सों में तापमान नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि धमाका किस उपकरण या तकनीकी खराबी के कारण हुआ और क्या कंट्रोल रूम में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।
यह भी जांच का विषय होगा कि प्लांट में अग्निशमन की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद थी या नहीं और हादसे के बाद कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए निर्धारित आपातकालीन प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। घटना के समय मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के बयान भी हादसे की वजह तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
तीन इंजीनियरों की मौत के बाद उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। संजीव कुमार केसरी फैक्ट्री में शिफ्ट इंचार्ज के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि विनीत महतो और अभिषेक पांडेय भी प्लांट में इंजीनियर के तौर पर कार्यरत बताए गए हैं।
पुलिस और संबंधित विभागों की जांच में अब यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या इसके पीछे सुरक्षा मानकों की अनदेखी अथवा किसी स्तर की लापरवाही जिम्मेदार थी। प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों की भी जांच किए जाने की जरूरत होगी।
फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन तीन कर्मचारियों की मौत ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीण और मृतकों के परिजन मुआवजे तथा नौकरी की मांग कर रहे हैं, जबकि हादसे की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए आगे की जांच पर सभी की नजर है।



