Bhisham Sharma statement: सरकार ने बहुत देर कर दी लाखों छात्रों का भविष्य हुआ प्रभावित : भीष्म शर्मा
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार ) : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं घोंडा के पूर्व विधायक भीष्म शर्मा ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा बहुत पहले आ जाना चाहिए था, क्योंकि नीट परीक्षा विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। उनके अनुसार, सरकार की देरी और लापरवाही का सबसे बड़ा नुकसान देश के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को उठाना पड़ा। भीष्म शर्मा ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों ने लगातार निष्पक्ष जांच, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई, लेकिन केंद्र सरकार ने लंबे समय तक मामले की गंभीरता को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय पर ठोस निर्णय लिए जाते, तो देशभर में छात्रों को सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और उनके भविष्य को लेकर इतना बड़ा संकट पैदा नहीं होता।उन्होंने कहा कि परीक्षा संबंधी विवादों ने लाखों युवाओं को मानसिक तनाव, असमंजस और निराशा की स्थिति में पहुंचा दिया। अनेक छात्रों के भविष्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और कई परिवारों को गहरी पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में सरकार की प्रत्येक चूक सीधे युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है, इसलिए जवाबदेही तय होना अत्यंत आवश्यक है।
भीष्म शर्मा ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उनका कहना था कि भारत की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा तंत्र की खामियां राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनीं, जिससे देश की प्रतिष्ठा को भी आघात पहुंचा। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही परीक्षा प्रणाली में व्यापक संस्थागत सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून, आधुनिक तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था तथा जवाबदेही तय करने की स्पष्ट नीति लागू की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। भीष्म शर्मा ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केवल एक शुरुआत है। वास्तविक न्याय तब होगा, जब छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास दोबारा स्थापित होगा और सरकार शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष एवं जवाबदेह बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि देश का युवा ही भारत का भविष्य है और उसके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।



