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Vinita Jain: यमुनापार संतों की तपोभूमि बनकर धर्म संस्कार एवं सामाजिक चेतना का केंद्र बना : विनीत जैन

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Vinita Jain: यमुनापार संतों की तपोभूमि बनकर धर्म संस्कार एवं सामाजिक चेतना का केंद्र बना : विनीत जैन

नई दिल्ली ( स्पर्श भारद्वाज ): भारतीय जनता पार्टी, शाहदरा जिला के जिला प्रवक्ता विनीत जैन ने कहा कि जैन धर्म में चातुर्मास केवल वर्षा ऋतु में संतों के एक स्थान पर विराजमान होने की परंपरा नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है। यह चार माह का पावन काल व्यक्ति के जीवन में आत्म अनुशासन, नैतिकता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है तथा समाज में संस्कार, सद्भाव और सेवा की भावना को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष यमुनापार क्षेत्र पूज्य दिगंबर जैन संतों के पावन सान्निध्य से विशेष रूप से धन्य हुआ है।श्री आचार्य 108 विशुद्ध सागर महाराज जी के मंगल वर्षायोग के साथ-साथ श्री आचार्य 108 श्रुत सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 प्रज्ञ सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 विनीत सागर जी महाराज सहित अनेक पूज्य मुनिराज एवं आर्यिका माताओं के चातुर्मास विभिन्न क्षेत्रों में संपन्न हो रहे हैं। उनके श्रीमुख से प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, अभिषेक, पूजन, विधान, संस्कार शिविर एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका लाभ हजारों श्रद्धालु प्राप्त कर रहे हैं। विनीत जैन ने कहा कि पूज्य संतों का तप, त्याग, अनुशासन और सादा जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके प्रवचनों से समाज में अहिंसा, सत्य, संयम, करुणा, सेवा, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, पारिवारिक संस्कार और राष्ट्रप्रेम जैसे मूल्यों का प्रसार हो रहा है।

वर्तमान समय में जब समाज भौतिकता और नैतिक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब संतों का मार्गदर्शन समाज को सही दिशा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह, सत्य और आत्मसंयम के सिद्धांत आज भी विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। चातुर्मास के माध्यम से इन सिद्धांतों का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है, जिससे समाज में सद्भाव, सहिष्णुता और मानवता की भावना को नई ऊर्जा मिल रही है। संतों के प्रवचन केवल जैन समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी धर्मों और वर्गों के लोगों को नैतिक जीवन, आत्मसंयम और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा देते हैं। नीत जैन ने कहा कि यमुनापार क्षेत्र में एक साथ अनेक पूज्य संतों का वर्षायोग होना पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य और गौरव का विषय है। इससे न केवल धार्मिक वातावरण का निर्माण हुआ है, बल्कि युवाओं, महिलाओं और बच्चों में भी धर्म एवं भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ी है। चातुर्मास के दौरान आयोजित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने समस्त श्रद्धालुओं एवं नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार सहित चातुर्मास के दौरान आयोजित प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठानों एवं सेवा कार्यों में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनें, पूज्य संतों का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा उनके बताए हुए आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर एक संस्कारित, समरस, नैतिक एवं सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

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