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युवा आन्दोलन के सामने धरी रह गई भाजपा की रणनीति धर्मेन्द्र प्रधान को हटाना मजबूरी बन गई थी भाजपा की – अश्वनी भारद्वाज

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युवा आन्दोलन के सामने धरी रह गई भाजपा की रणनीति धर्मेन्द्र प्रधान को हटाना मजबूरी बन गई थी भाजपा की – अश्वनी भारद्वाज

नई दिल्ली ,धर्मेन्द्र प्रधान करीब दो महीने से सभी अखबारों की सुर्ख़ियों में थे, और इतने जबर्दस्त तरीके से थे कि देश का बच्चा -बच्चा उनका नाम जान गया था कौन है ये धर्मेन्द्र प्रधान ,युवा वर्ग उनके नाम से नफरत करने लगा था आन्दोलनकारी उनके इस्तीफे से कम कोई बात नहीं सुनना चाहते थे | नफरत की यह आंच प्रधानमन्त्री तक को लपेटे में ले रही थी, वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार में इस्तीफे की कोई परम्परा ही नहीं है यह जुमला बार-बार सुनने को मिल रहा था जो आग में घी डालने का काम कर रहा था | इतना ही नहीं प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी हों या उनके रणनीतिकार उन्हें यह तनिक भी आभास नहीं था कि युवाओं का यह आन्दोलन एक जन आन्दोलन का रूप ले लेगा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियाँ इसे मुद्दा बना सरकार को इस कद्र घेर लेंगी कि सरकार को जवाब तक देना भारी पड़ जाएगा | खुद प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को संसद से गायब रहना पड़ेगा | कुल मिलाकर 12 साल में ऊंट पहाड़ के नीचे पहली बार आया और उसे पता चला देश की युवा शक्ति में कितनी ताकत है और शायद यह इसीलिए कहा जाता रहा है कि देश उधर ही चलता है जिधर जवानी चलती है | दरअसल प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी तो धर्मेन्द्र प्रधान से प्रधानी लेना चाहते थे लेकिन उनकी सलाहकार मंडली उन्हें गुमराह कर रही थी और उन्हें बार -बार 56 इंच की याद दिला रही थी उसी मिथक के चलते केंदीय मंत्रीमंडल का जो विस्तार संसद के सत्र से पहले होना था उसे तक टाल दिया था | रणनीतिकारों को यह उम्मीद थी चंद दिनों में यह मामला शांत हो जाएगा और यदि तूल भी पकड़ा तो सत्र के बाद मंत्रीमंडल में फेरबदल कर धर्मेन्द्र प्रधान का विभाग बदल दिया जाएगा लेकिन यह रणनीति कामयाब नहीं हुई, क्यंकि ना केवल जन्तर मन्तर बल्कि पूरे मुल्क से केंद्र सरकार के खिलाफ एक आवाज चिंगारी बनती जा रही रही थी जिसे तमाम विपक्षी दलों नें भी हवा दी और आने वाले खतरे को भांप आखिर धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफ़ा लेने में ही भलाई दिखाई दी भाजपा को | यह बात अलग है भाजपा की सोशल मीडिया टीम अब धर्मेन्द्र प्रधान के गुणगान करने में जुटी है | इस टीम को किसान आन्दोलन फर्जी लगता था वहीं अब छात्र एवं युवा आन्दोलन भी फर्जी दिखता है इतना ही नहीं विदेशी ताकतों के इशारे पर शुरू हुआ आन्दोलन तक बताया गया , लेकिन इस तरह के नेरेटिव बार-बार कामयाब नहीं हुआ करते खास तौर से युवा शक्ति को गुमराह कोई भी टीम नहीं कर सकती | आखिर किसी भी देश का भविष्य और शक्ति जो होते हैं युवा एक दो बार नहीं बल्कि अतीत गवाह है इस बात का जे.पी.आन्दोलन रहा हो या मंडल कमीशन के खिलाफ हुआ आन्दोलन उन्होंने सरकारों को जगाया भी है और झुकाया भी है | आज बस इतना ही …

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