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International Dharma Sansad: अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद में डॉ. बसंत गोयल ने लिया श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और गौ माता को राष्ट्रीय माँ घोषित कराने का संकल्प

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International Dharma Sansad: अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद में डॉ. बसंत गोयल ने लिया श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और गौ माता को राष्ट्रीय माँ घोषित कराने का संकल्प

नई दिल्ली ( स्पर्श भारद्वाज ) :  श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति एवं जन जागरण के उद्देश्य से आयोजित अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद में देश-विदेश से आए 300 से अधिक संत-महात्माओं, धर्माचार्यों एवं सनातन धर्म के अनुयायियों ने एक स्वर में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के अधिकार और गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने के लिए संकल्प लिया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में गोयल मेडिकोस के सीईओ एवं संस्थापक डॉ. बसंत गोयल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे | और उन्होंने धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्रहित के लिए अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त किया।
अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने तथा इसके प्रति व्यापक जन जागरण करने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी 300 से अधिक संत, महंत, धर्मगुरु एवं सनातन धर्म के समर्थक शामिल हुए। सभी उपस्थित संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को उसके वास्तविक स्वरूप में पुनः स्थापित करने तथा सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डॉ. बसंत गोयल ने भावुक एवं ओजस्वी शब्दों में अपना संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सनातन समाज अपनी इस पवित्र जन्मभूमि के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है और अब समय आ गया है कि इस मांग को न्यायपूर्ण समाधान मिले।

डॉ. गोयल ने सभा के समक्ष विशेष प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि यदि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का अधिकार सनातन समाज को नहीं मिलता और गौमाता को राष्ट्रीय माता का सम्मान प्राप्त नहीं होता, तो वे अपने जीवन को भी इस उद्देश्य के लिए समर्पित करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए केवल दो प्रमुख लक्ष्य हैं पहला, गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाना और दूसरा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि का अधिकार प्राप्त करना।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं और धार्मिक अधिकारों की रक्षा प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। उनका मानना है कि गौमाता भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और आध्यात्मिक जीवन का अभिन्न अंग रही हैं तथा उन्हें राष्ट्रीय माता का सम्मान मिलना चाहिए। वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसके सम्मान एवं अधिकार की रक्षा समाज का दायित्व है।

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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संत-महात्माओं ने भी समाज को एकजुट होकर धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि जनजागरण के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाई जाएगी और शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीकों से अपनी बात देश के सामने रखी जाएगी।
धर्म संसद में विभिन्न संतों और धर्माचार्यों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भूमि का प्रश्न नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सनातन सभ्यता के सम्मान का विषय है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों ने भी इस अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
विशेष रूप से डॉ. बसंत गोयल की प्रतिज्ञा ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनके संकल्प को कई संतों और धर्माचार्यों ने सराहा तथा इसे धर्म और संस्कृति के प्रति उनकी निष्ठा का प्रतीक बताया। उपस्थित जनसमूह ने भी उनके संकल्प का समर्थन करते हुए जय श्रीकृष्ण और गौमाता के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
यह सम्पूर्ण कार्यक्रम पूज्य फलाहारी महाराज  दिनेश शर्मा  के पावन सानिध्य, मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद में सम्पन्न हुआ। उनके नेतृत्व में आयोजित इस धर्म संसद ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए जनजागरण अभियान को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में सभी संतों, धर्माचार्यों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने तथा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति एवं गौसंरक्षण के लिए जन-जन तक संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया।
अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद के इस आयोजन को सनातन समाज के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन और गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने की मांग को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

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