Delhi politics controversy: विवादों में उलझी राजनीति, मुद्दों से भटकी दिल्ली : विपिन शर्मा
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार ): राजधानी की राजनीति एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप और कथित “शीशमहल 2” जैसे विवादों में उलझती नजर आ रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि दिल्ली की जनता रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रही है। भीषण गर्मी के बीच बढ़ता वायु प्रदूषण, पानी की किल्लत , दूषित जलापूर्ति ,जाम से जूझती सड़कें और सफाई व्यवस्था की बदहाली लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है। इसके बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि विकास और जन सुविधाओं के बजाय राजनीतिक एजेंडा प्राथमिकता बनता जा रहा है, जिससे आम आदमी की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं। ऐसे माहौल में जनता अब ठोस कार्रवाई और जवाबदेही की मांग कर रही है, न कि अंतहीन राजनीतिक विवादों की। रोहतास नगर से पूर्व विधायक विपिन शर्मा ने “शीशमहल 2” विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिल्ली की जनता को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि अपने बुनियादी मुद्दों का समाधान चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा ऐसे विवादों को उछालकर असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है, वहीं आम आदमी पार्टी अपनी साख बचाने में लगी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली इस समय कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, जिनमें प्रदूषण, पानी व ट्रैफिक जाम और सफाई व्यवस्था प्रमुख हैं।
इसके अलावा बेरोजगारी भी बड़ी चुनौती बन चुकी है और युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह रोजगार सृजन और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए। गैस सिलेंडर की किल्लत पर भी चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कई इलाकों में समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहे और कालाबाजारी की शिकायतें बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता परेशान है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में होने के नाते उसकी जिम्मेदारी है कि वह इन समस्याओं का समाधान करे, जबकि आम आदमी पार्टी को विपक्ष की रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। मगर दोनों दल आपसी आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हुए हैं। विपिन शर्मा ने कहा कि 11 साल तक आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का समय बर्बाद किया और अब भाजपा भी उसी राह पर चल रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि दिल्ली को विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है तो पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विकास मॉडल से सीख लेनी होगी। अंत में उन्होंने कहा कि इस तरह के विवादों से न महंगाई कम होगी, न प्रदूषण घटेगा और न ही जनता को राहत मिलेगी। दिल्ली को इस समय गंभीर और जवाबदेह शासन की जरूरत है।



