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बॉलीवुड का ये असाधारण विलेन कभी करता था लाहौर में बनी फिल्मों में काम, जानें कैसे बदली थी किस्मत

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बॉलीवुड का ये असाधारण विलेन कभी करता था लाहौर में बनी फिल्मों में काम, जानें कैसे बदली थी किस्मत

50 साल के लंबे करियर में प्राण ने 350 से ज्यादा फिल्में कीं. कभी लाहौर में बनी फिल्मों में दिखने वाला ये एक्टर कैसे पहुंचा मुंबई में बनने वाली फिल्मों तक, यहां जानें.

बॉलीवुड के असाधारण विलेन की बात आती है, तो सबसे पहले जो नाम जहन में उभरकर आते हैं उनमें से एक प्राण हैं. पांच दशकों के लंबे करियर में प्राण ने 350 से ज्यादा फिल्में कीं. उन्होंने दर्शकों को इस कदर डराया कि वो बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन बन गए. 12 फरवरी को दिल्ली के बल्लीमारान में जन्में प्राण का बर्थडे है. ऐसे में उनसे जुड़ी कुछ सुनी तो कुछ अनसुनी बातें जानते हैं.

अभिनेता नहीं फोटोग्राफर बनना चाहते थे प्राण

द क्विंट के एक आर्टिकल के मुताबिक, प्राण का भले ही मुख्य पेशा एक्टिंग रहा हो, लेकिन जब वो एक्टर नहीं थे. तब वो फोटोग्राफी में करियर बनाना चाहते थे. उन्होंने दिल्ली में ही ये काम शुरू भी कर दिया था. इसके बाद, वो दिल्ली से लाहौर जा पहुंचे. यहीं से उनकी किस्मत बदल गई. लाहौर में प्राण एक पान की दुकान में खाने के बाद पान खाने जाते थे.

यहीं राइटर वली मोहम्मद वली ने उन्हें देखा और उनसे एक्टिंग के लिए पूछा. वली को लगा कि उनकी पंजाबी फिल्म यमला जट के लिए जो मुख्य कलाकार चाहिए थे, उनमें से एक के लिए प्राण फिट बैठते हैं. प्राण ने उनका दिया ऑफर ले लिया. लेकिन प्राण मिलने नहीं पहुंचे. ऐसे में जब अगली मुलाकात वली और प्राण की एक सिनेमाहॉल में हुई तो वली नाराज हुए. प्राण से उनका पता ले लिया और उन्हें उनके घर बुलाने पहुंच गए. फिल्म में प्राण को विलेन का किरदार दिया गया और 1940 की ये फिल्म बड़ी हिट साबित हुई.

प्राण को करना पड़ा था स्ट्रगल

प्राण की पहली हिंदी फिल्म 1943 में आई ‘खानदान’ थी. इस फिल्म में प्राण ने हीरो का रोल प्ले किया था. इसके बाद, प्राण लाहौर से मुंबई आ गए. क्योंकि ये वही दौर था जब भारत को आजादी मिलने वाली थी. प्राण को सांप्रदायिक हिंसा और दंगों की बू आ रही थी. इस वजह से उन्होंने लाहौर छोड़ दिया. प्राण जब इंडिया आए तो वो अपनी पत्नी और बेटे के साथ इंदौर पहुंचे, लेकिन लाहौर जाने की इच्छा होने के बावजूद वो वापस नहीं जा सके.

जब वो मुंबई पहुंचे तो उन्हें जल्द ही एहसास हो गया कि लाहौर में बनी उनकी 20 फिल्मों में उनकी एक्टर का असर मुंबई मे बन रही हिंदी फिल्मों पर नहीं पड़ने वाला. उनको उस समय अपना गुजारा चलाने के लिए पत्नी के गहने तक बेचने पड़े थे. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और हिंदी फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेर दिया.

लाखों में लेते थे फीस

प्राण 1960-70 के दशक में एक फिल्म के लिए 5 से 10 लाख रुपये लेते थे. तब उनसे ज्यादा फीस सिर्फ दो बॉलीवुड एक्टर को ही मिलती थी. शशि कपूर और राजेश खन्ना. प्राण ने अपने 50 साल के करियर में 350 से ज्यादा फिल्में कीं. पूरब और पश्चिम, जंजीर,भाग्यवान, शहीद, परिचय, नसीब और डॉन जैसी फिल्मों में उन्हें काफी पसंद किया गया.

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