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जीएसटी के नाम पर उत्सव नहीं पछतावा दिवस मनाना चाहिए सरकार को : परमानन्द शर्मा

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परमानन्द शर्मा
जीएसटी के नाम पर उत्सव नहीं पछतावा दिवस मनाना चाहिए सरकार को : परमानन्द शर्मा

जीएसटी के नाम पर उत्सव नहीं पछतावा दिवस मनाना चाहिए सरकार को : परमानन्द शर्मा

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : जीएसटी के नाम जनता को आठ साल तक गब्बर सिंह टेक्स के नाम लूटने वाली भाजपा सरकार अब उत्सव मनाती घूम रही है | जबकि सरकार को पछतावा दिवस मनाना चाहिए और जनता से वसूले हजारों करोड़ रूपये वापस करने चाहिए यह कहना है राम नगर ब्लाक नाग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा निगम का चुनाव लड़े परमानन्द शर्मा का |

परमानन्द शर्मा कहते हैं भाजपा के केन्द्रीय मंत्री ,दिल्ली सरकार के मंत्री , विधायक , मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली के बाजारां में दर-दर भटक कर दुकानदारों को जीएसटी के फायदे गिना रहे है,उत्सव मना रहे हैं अपने लोगो से ही खुद पुष्प वर्षा करा रहे हैं , लेकिन उपभोक्ताओं से नजरे छिपा रहे है क्योंकि उपभोक्ताओं तक जीएसटी का फायदा नही मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूंजीतियों को सरंक्षण देने वाली पार्टी है और दुकानदारों पर जीएसटी को लागू करने पर दबाव नही बना रही है। देश भर में 375 वस्तुओं और सेवाओं पर अगर पुराने स्टॉक से देश भर में जीएसटी वसूला गया तो निम्न, मध्यम वर्ग, किसानों और गरीबी रेखा से नीचे के लोगों से करोड़ों रुपये अतिरिक्त वसूले जाएंगे, इस पर सरकार पूरी तरह चुप है। परमानन्द शर्मा नें जीएसटी में अधूरा बदलाव बताते हुए कहा कि सरकार को जनता से माफी मांगनी चाहिए और स्वदेशी के नाम पर चीन से आयत के आंकड़े देखने को कहा। परमानन्द शर्मा नें इन कथित सुधारों को ‘अधूरा’ और ‘आठ साल की देरी’ से लागू हुआ करार दिया है। परमानन्द कहते हैं राहुल गांधी ने इसे पहले ही गब्बर सिंह टैक्स बताया था।

पिछले आठ साल मोदी सरकार ने जीएसटी को ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बनाकर आम जनता, छोटे व्यापारियों और एमएसएमई पर बोझ डालकर उन्हें लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दाल-चावल, किताबें, पेंसिल, चिकित्सा उपचार और किसानों के ट्रैक्टर जैसे आवश्यक सामानों पर भारी जीएसटी थोपा, जिससे जनता त्रस्त रही। सरकार ने अलग-अलग टैक्स स्लैब के साथ ‘गब्बर सिंह टैक्स’ लागू किया और आठ साल में 55 लाख करोड़ रुपये वसूले। परमानन्द शर्मा कहते हैं जीएसटी कम करके मोदी जी का कहना यह ‘‘बचत का त्यौहार’’ है, क्या पिछले 8वर्ष जीएसटी की बढ़ी दरों के साथ ‘‘लूट के त्यौहार’’ थे।

आठ साल में जीएसटी के नाम पर देश की जनता को जमकर लूटने वाले आज गरीबों के रहनुमा बनना चाहते हैं लेकिन देश की जनता इनका चेहरा पहचान चुकी हाई और इन्हें माफ़ नहीं करने वाली |

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