Mumbai Protest 5th July: हिंदी अनिवार्यता के खिलाफ ठाकरे बंधु का संयुक्त मोर्चा, 5 जुलाई को मुंबई में करेंगे विरोध मार्च
मुंबई, 4 जुलाई 2025 – महाराष्ट्र की राजनीति में एक दुर्लभ क्षण देखने को मिला है, जब दशकों से अलग राह पर चलने वाले ठाकरे बंधु—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—एक मंच पर आकर राज्य सरकार की भाषा नीति के खिलाफ संयुक्त विरोध का ऐलान कर चुके हैं। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) मिलकर 5 जुलाई को मुंबई में त्रिभाषा नीति के अंतर्गत कक्षा 4 तक हिंदी को अनिवार्य बनाने के फैसले के खिलाफ संयुक्त मार्च निकालेंगे।
शिवसेना (यूबीटी) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पहले दोनों दलों ने अलग-अलग तारीखों पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी—शिवसेना (यूबीटी) 6 जुलाई और एमएनएस 7 जुलाई को। लेकिन बाद में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच हुई बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया कि एकजुट होकर विरोध करना अधिक प्रभावशाली होगा। राउत ने कहा, “यह अच्छा नहीं होता कि एक ही मुद्दे पर दो रैलियां निकाली जातीं। इसलिए दोनों दल अब एक साथ 5 जुलाई को विरोध करेंगे।”
संजय राउत ने स्पष्ट किया कि यह विरोध हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं है, बल्कि एक शैक्षणिक दृष्टिकोण से है। उन्होंने कहा, “हमने हमेशा हिंदी भाषा का सम्मान किया है। खुद हमारी पार्टी ने कई स्तरों पर हिंदी का इस्तेमाल किया है। लेकिन कक्षा 4 तक हिंदी को अनिवार्य करना छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। यह फैसला शैक्षणिक और भाषाई दृष्टिकोण से सही नहीं है।”
इस मुद्दे पर राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अमित शाह महाराष्ट्र के राजनीतिक दुश्मन हैं। उन्होंने ही चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप करके बालासाहेब ठाकरे की असली शिवसेना को तोड़ा। वे बार-बार महाराष्ट्र की स्वायत्तता और सम्मान पर चोट कर रहे हैं। ऐसे व्यक्ति की बात पर हमें ध्यान क्यों देना चाहिए?”
राउत ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में भाषा नीति को लेकर अंतिम फैसला एकतरफा नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के उस बयान का स्वागत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी भी भाषा नीति पर साहित्यकारों, शिक्षाविदों, राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों से सलाह-मशविरा करके ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ठाकरे बंधुओं का यह एकजुट होना केवल भाषा नीति का विरोध नहीं है, बल्कि यह आने वाले विधानसभा चुनावों के पहले राजनीतिक संकेत भी हो सकता है। वर्षों की कटुता और सियासी प्रतिस्पर्धा के बाद एक मुद्दे पर दोनों भाइयों का साथ आना न केवल महाराष्ट्र की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक व्यापक गठबंधन की संभावना की ओर भी संकेत करता है।
मुंबई में होने वाला यह विरोध मार्च राज्य सरकार के उस कथित फैसले के खिलाफ है जिसमें त्रिभाषा नीति के तहत सभी स्कूलों में हिंदी को प्राथमिक कक्षाओं तक अनिवार्य किया जा रहा है। इस नीति को लेकर राज्यभर में बहस छिड़ी हुई है, खासकर मराठी भाषा की प्राथमिकता और क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर।



